युवा कृषि वैज्ञानिक की बुखार से मृत्यु, ग्रामीणों की आंखे नम

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युवा कृषि वैज्ञानिक की बुखार से मृत्यु, ग्रामीणों की आंखे नम

अनुराग पाठक की रिपोर्ट

हरदोई-  गर्मी मौसम के चलते कस्बे सहित ग्रामीण क्षेत्र में बुखार तेजी से फैल रहा है। प्रत्येक परिवार का कोई न कोई व्यक्ति बुखार से प्रभावित है। वहीं सरकार कोरोना महामारी की दूसरी लहर के चलते ओपीडी सेवा बंद कर दी है। जिससे आम जनमानस गांव सहित कस्बे में भी झोलाछाप डॉक्टरों से इलाज कराने को मजबूर हैं।    विकासखंड कछौना में ग्राम पैरा निवासी पूर्व प्रधान अजय पाल के 30 वर्षीय पुत्र कृषि वैज्ञानिक धीरज पाल की लखनऊ के प्राइवेट हॉस्पिटल में रविवार की दोपहर मृत्यु हो गई। इस घटना से परिवार में कोहराम मच गया है। कृषि वैज्ञानिक की शादी 29 अप्रैल को संडीला में निश्चित थी। गांव की युवा प्रतिभा की मृत्यु से सभी ग्रामीणों की आंखें नम है। परिवार के ऊपर दुख का पहाड़ टूट पड़ा है। सरकार की जवाबदेही न होने का खामियाजा आम जनमानस को अपनी जान की कीमत देकर उठाना पड़ रहा है। स्वास्थ्य सेवाएं राम भरोसे हैं। कोरोना का भय लोगों में बैठ चुका है। आबादी के अनुपात में सरकारी विभाग में स्वास्थ्य कर्मी कम है। वह भी मूलभूत सुविधाओं से जूझ रहे हैं। सरकार की प्राथमिकता स्वास्थ्य सेवाएं देना महत्वपूर्ण नहीं है, जबकि चुनाव पहली प्राथमिकता है। हाईकोर्ट की कई बार फटकार के बाद भी सरकार चेत नहीं रही है। जिससे आम जनमानस से प्राइवेट अस्पताल वर्षों से गाढ़ी कमाई लूट रहे हैं। मृतक सण्डीला विधायक राजकुमार अग्रवाल के प्रतिनिधि सिद्ध पाल सिद्धू के परिवार का था पूरे गांव में शोक की लहर है।