कोरोना से कम लाहपरवाही से मर रहे है लोग कही ऑक्सीजन, तो कही डॉक्टरों की लाहपरवाही

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कोरोना से कम लाहपरवाही से मर रहे है लोग कही ऑक्सीजन, तो कही डॉक्टरों की लाहपरवाही

मोहित गुप्ता की कलम से

हरदोई-जनपद से जनता की एक ही पुकार की आप सोचिए कि अगर बाज़ार से शुगर की दवा हटा ली जाए तो क्या होगा कितने शुगर के मरीज़ दवा ना मिलने की वजह से मर जाएँगे । 
अगर ख़ून पतला करने वाली दवा अचानक बाज़ार में ना मिले तो क्या होगा कितने दिल के मरीज़ मारे जाएँगे ।
अगर बीपी को नियंत्रण करने वाली दवा बाज़ार में मिलनी बंद हो जाए तो कितने बीपी के मरीज़ दवा के अभाव में मर जाएँगे। 
लोग कोरोना से नहीं मर रहे हैं । लोग ऑक्सिजन ना मिलने से , दवा ना मिलने से , बेड ना मिलने से , वेंटीलेटर ना मिलने से मर रहे हैं । लोगों को कोरोना नहीं मार रहा है , सिस्टम मार रहा है । 
सरकार आपको समय पर दवा से लेकर ऑक्सिजन तक देने में विफल हो गयी है । सरकार ने पिछले 15-16 महीने अपनी पीठ थपथपाने के अलावा कुछ नहीं किया , इस समय में ना सरकार ने अस्पताल बढ़ाए , ना अस्पताल के बेड बढ़ाए और ना अस्पताल की सुविधाएँ बढ़ायी । ऑक्सिजन तक बढ़ाने में सरकार फ़ेल हो गयी बल्कि जो ऑक्सिजन देश के पास थी , उसे भी सरकार निर्यात करके पैसे कमा रही थी । 
नैतिकता का भाजपा से कोई नाता नहीं है।