शहर की ट्रैफिक व्यवस्था से व्यवस्था से संतुष्ट नहीं हैं आईजी

एनबीडी टीम कानपुर। शहर की यातायात व्यवस्था की हालत कितनी खराब है, इसका पता आपको शहर में दाखिल होते ही लग जाएगा। यह स्थिति तब है जब यातायात को कंट्रोल करने और जाम को रोकने के लिए शहर में करोड़ों का आईटीएमएस लगाया गया है। इसके कंट्रोलरूम पर बैठे-बैठे हर चौराहे से गुजरने वाले हर
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शहर की ट्रैफिक व्यवस्था से व्यवस्था से संतुष्ट नहीं हैं आईजी

एनबीडी टीम

कानपुर। शहर की यातायात व्यवस्था की हालत कितनी खराब है, इसका पता आपको शहर में दाखिल होते ही लग जाएगा। यह स्थिति तब है जब यातायात को कंट्रोल करने और जाम को रोकने के लिए शहर में करोड़ों का आईटीएमएस लगाया गया है। इसके कंट्रोलरूम पर बैठे-बैठे हर चौराहे से गुजरने वाले हर वाहन पर नजर रखी जा सकती है, लेकिन कोई फायदा नहीं। जाम भी जस का तस है और टै्रफिक नियमों की भी किसी को फिक्र नहीं है। यही स्थिति खुद आईजी रेंज मोहित अग्रवाल ने भी देखी।

चिराग तले अंधेरा
शहर में यातायात की इस स्थिति से तंग आईजी रेंज मोहित अग्रवाज जब आईटीएमएस के कंट्रोल रूम पहुंचे तो उन्हें यहां चिराग तले अंधेरा वाली स्थिति दिखी। शहर के हर चौराहे पर करोड़ों खर्च करके हाईटेक कैमरे, स्पीड रडार लगवाए गए हैं। ताकि यदि कोई यातयात नियम तोड़े तो उसके खिलाफ तुरंत कार्रवाई की जा सके। लेकिन सभी कैमरों और स्पीड रडार को कंट्रोल करने वाले आईटीएमएस का कंट्रोल रूम किसी जिम्मेदार अधिकारी के नियंत्रण में नहीं है।

आईजी ने खड़ा किया सवाल
जब आईजी रेंज मोहित अग्रवाल ने इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (आईटीएमएस) के कंट्रोल रूप पर पहुंचे तो ट्रैफिक की हालत पस्त देख दंग रह गए। बरबस बोल पड़े, करोड़ों का आईटीएमएस यूजलेस क्यों पड़ा है.? एसपी ट्रैफिक इसका जवाब नहीं दे सके। उन्हें पता चला कि सिर्फ दो सिपाहियों के हवाले कंट्रोलरूम है। इस पर आईजी ने सख्ती से कहा कि दस प्रमुख चौराहों की स्थायी रूप से निगरानी होगी। दो शिफ्ट में छह-छह पुलिस कर्मी नियमित ड्यूटी करेंगे। एक ट्रैफिक इंस्पेक्टर को इसका जिम्मा दिया जाएगा, जबकि एसपी ट्रैफिक सुशील कुमार और सीओ ट्रैफिक अजीत कुमार रजक को दो-दो घंटे रोजाना कंट्रोलरूम से चौराहों की निगरानी करने का आदेश दिया।

मिली कई तकनीकी खामियां
आईजी को कंट्रोलरूम की स्क्रीन का एक हिस्सा गड़बड़ मिला। पता चला कि छह महीने से स्क्रीन खराब है। उनके आने से पहले ही कंपनी के कर्मचारियों ने ठीक किया है। आईजी ने सीओ ट्रैफिक से पूछा कि आखिरी बार कंट्रोलरूम में कब जाए थे? सीओ ने बोल दिया कि 25 दिन पहले आए थे। आईजी ने कहा कि अगर आप 25 दिन पहले आए होते तो तीन महीने से खराब स्क्रीन की जानकारी आपको होती। साथ ही कहा कि मेंटीनेंस करने वाली कंपनी पर जुर्माना लगाया जाए। इसके बाद आईजी ने पब्लिक एड्रेस सिस्टम से बड़ा चौराहा पर निर्देश देने का प्रयास किया तो वह ठप मिला। उन्होंने कहा कि कंट्रोलरूम में वायरलेस सिस्टम भी लगाया जाए।

बढ़ाया जाएगा फोर्स
शहर में व्यवस्था सुधार के लिए आईजी ने ट्रैफिक पुलिस को 50 पुरुष और 50 महिला कांस्टेबल देने की बात कही। एसपी ट्रैफिक ने बताया कि दो महीने पहले सौ कांस्टेबल मिले हैं, जिनमें 50 ने ही ज्वाइन किया। इनमें भी 23 पुलिस कर्मी 50 साल से अधिक उम्र के और बीमार हैं। आईजी ने इन्हें रिप्लेस करके युवा सिपाहियों को देने की बात कही।