बिना पैसा व दारू बांटे चुनाव लड़ो तो कुछ बात बने वोट के बदले नोट तो कैसे होगा विकास

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बिना पैसा व दारू बांटे चुनाव लड़ो तो कुछ बात बने वोट के बदले नोट तो कैसे होगा विकास

 राम कैलाश पटेल की रिपोर्ट

अमेठी -त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में धनबल व शराब बल पूरी तरह से हावी हो चुका है यह हाल महज एक क्षेत्र का ही नहीं बात करते हैं संपूर्ण अमेठी कि वह चाहे गौरीगंज हो या अमेठी मुसाफिरखाना तिलोई हर क्षेत्र में डीडीसी प्रत्याशियों से लेकर प्रधान बीडीसी प्रत्याशी चुनाव जीतने की होड़ में पानी की तरह पैसा व शराब मतदाओं में बहा रहे हैं सूत्रों की माने तो चिलचिलाती धूप के बीच दोपहर में जिले के गांव में प्रत्याशियों की जुए की भांति रुपए व शराब की फड़े लग जाती हैं सूत्रों की माने तो जिला पंचायत प्रत्याशी प्रति मतदाता ₹500 से लेकर मतदाओ के घर जाकर₹2000 प्रधान प्रत्याशी ₹100 से ₹500 तक खुला खर्च कर रहे हैं इसके अतिरिक्त कच्ची व पक्की शराब भी धड़ल्ले से मतदाताओं में खुलेआम बांट रहे हैं इस हिसाब से जिला पंचायत प्रत्याशी करीब 5000000 प्रधान प्रत्याशी करीब 15 से 20 लाख चुनाव में खर्च कर चुनाव जीतने की प्रत्याशी इतनी बड़ी राशि खर्च कर प्रधान जिला पंचायत सदस्य बीडीसी बनेगा
तो वह विकास के मामले में कितनी लूट मच आएगा आप इसका केवल अनुमान ही लगा सकते हैं आज बाहुबल धनबल और शराब बल के इस्तेमाल ने देश व समाज को राजनीति को पूरी तरह से गंदा कर दिया है आज कोई भी पढ़ा लिखा सीधा-साधा ईमानदार व्यक्ति चुनाव लड़ने की हिम्मत नहीं करता आज भ्रष्ट किस्म के पूज्य पत्ती पैसे के बल और माफिया किस्म के लोग गुंडागर्दी शराब शबाब कबाब के दम पर चुनाव जीतकर विधानसभा और लोकसभा तक पहुंच रहे हैं ऐसे लोग जितनी भी पूंजी लगाकर चुनाव जीते हैं ब्याज समेत मुनाफे के तौर पर विकास के नाम पर लूट रहे हैं इन सब बातों को मतदाताओं को समझनी होगी पैसे शराब और जात पात पर वोट देकर हम विकास की सोच कतई नहीं रख सकते हैं जनता को चाहिए कि ऐसे लोगों को बहिष्कार शुरू कर दें तो हकीकत में विकास का पहिया जमीनी धरातल पर दिखाई पड़ने लगेगा लोकतंत्र के लिए धनबल बाहुबल शराब बल यह तीनों खतरनाक है जरूरत कि हम प्रत्येक मतदाताओं को धनबल शराब बल और बाहुबल से लोकतंत्र को हो रहे नुकसान की बात समझने में सफल साबित हो आम जनता यदि जग जाए तो लोकतंत्र की सारी बीमारी अपने आप खुद ही भाग जाएगी।