नहरें सूखी, प्यास बुझाने को पशु-पक्षी ठोकरें खाने को मजबूर 

 | 
नहरें सूखी, प्यास बुझाने को पशु-पक्षी ठोकरें खाने को मजबूर

 हरिकेश यादव की रिपोर्ट

प्रतापगंज-सुल्तानपुर:- जहां एक ओर मानव अपनी जान बचाने के लिए कोरोना व खराब स्वास्थ्य सेवाओं से जूझ रहा है तो वहीं दूसरी ओर पशु-पक्षी अपनी प्यास बुझाने के लिए दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं। क्षेत्र की नहरों में पानी का अभाव होने से भीषण गर्मी में मवेशियों की सुध लेने वाला कोई नहीं है।
        मई का महीना  है और गर्मी अपनी चरम पर है। जहां पूरा देश कोरोना महामारी व खराब स्वास्थ्य सेवाओं की विभीषिका का शिकार है तो दूसरी ओर गर्म मौसम में अपनी प्यास बुझाने के लिए मवेशियों का दर-दर भटकना आम बात है। कारण कि क्षेत्र की सभी नहरें व तालाब सूखे पड़े हैं। मानव तो अपनी समस्या एक-दूसरे से साझा कर लेता है किन्तु बेजुबान पशु-पक्षियों की समस्या को सुनने वाला कोई नहीं है। हमारे संवाददाता की पैनी नजर उस वक्त पड़ गयी जब कुछ मवेशी पानी की तलाश में स्थानीय शारदा नहर की प्रतापगंज ब्रांच में भटक रहे थे। वहीं कुछ किसानों ने भी बताया कि रबी की फसल काटते समय आसपास पानी न होने के कारण घरों से ही पानी लेकर आना पड़ रहा है किन्तु जानवरों को प्यास बुझाने के लिए भटकना पड़ता है। आजकल सोशल मीडिया पर तो कुछ ऐसे संदेश शेयर किए जाते हैं जिसमें यह बताया जाता है कि अपनी-अपनी छतों पर किसी पात्र में पानी भरकर रख दीजिए जिससे भटकते हुए पक्षियों को प्यास बुझाने का अवसर मिल जाए। किंतु हकीकत में इन मवेशियों की सुध लेने वाला कोई नहीं है। इन दिनों करो नाऔर छुट्टे जानवरों। शायद अब इन भटकते मवेशियों की ओर भी ध्यान जाए। नहरों में पानी के अभाव के कारण कभी-कभी आग से जल रही रबी की फसल को बचाने के लिए काफी मुश्किलों का सामना भी करना पड़ा है। पानी के अभाव में फसलें जलकर राख हो गई है। अब देखना यह है सुल्तानपुर के डीएम और सुल्तानपुर सांसद मेनका गांधी क्या करती हैं क्या उच्चाधिकारियों को नहर में पानी आने के लिए बोलती हैं या बेजुबान जानवर और किसान कौन सुधलेगा