भड़काऊ भाषण पर पद गंवाने वाले पहले विधायक बने आजम , दूसरी वजहों से 17 साल में 35 MLA पर हो चुकी है कार्यवाही

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विधानसभा

प्रधान संपादक की रिपोर्ट

आजम खां पहले ऐसे विधायक हैं जिनकी विधायकी भड़काऊ भाषण के चलते चली गई। वैसे, यूपी विधानसभा में कई सदस्य अपनी विधायकी गवां चुके हैं। देश की सबसे बड़ी विधानसभा में बीते 17 सालों में 35 सदस्य अपनी सदस्यता खो चुके हैं। 16 वीं विधानसभा में तो 20 विधायकों की सदस्यता अलग-अलग समय पर विधानसभा अध्यक्ष ने दल-बदल विरोधी कानून के तहत खत्म कर दी जबकि 17 वीं विधानसभा में अदिति सिंह, राकेश सिंह, नितिन अग्रवाल के खिलाफ इसी आधार पर सदस्यता खत्म कराने की याचिका तत्कालीन विधानसभा अध्यक्षों ने सही नहीं माना और याचिका खारिज कर दी। प्रसपा अध्यक्ष शिवपाल यादव की सदस्यता खत्म कराने की मुहिम सपा ने शुरू की थी लेकिन बाद में याचिका वापस ले ली। यह अलग बात है कि इसी विधानसभा के दौरान अदालती आदेश से चार अन्य विधायकों की सदस्यता खत्म हुई और लंबे समय तक चुनाव लड़ने पर रोक लग गई।
विधायकी गई तो मंत्री पद भी गया
वर्ष 2007 में 13 तेरह सदस्यों की सदस्यता दलबदल में समाप्त हुई थी। उनमें छह मंत्रियों राजपाल त्यागी, राजेंद्र सिंह राणा, योगेश प्रताप सिंह, बीरेन्द्र सिंह बुन्देला, शैलेन्द्र सिंह और दिनेश सिंह को विधायकी जाने के कारण मंत्री पद भी छोड़ना पड़ा था। 15 वीं विधानसभा में बाहुबली नेता डीपी यादव की पत्नी उमिलेश बदायूं बिसौली से चुनाव जीती थीं। उपविजेता ने उन पर ज्यादा पैसा खर्च करने व पेड न्यूज छपवाने की शिकायत की। वर्ष 2011 में चुनाव आयोग ने उनकी सदस्यता रद्द कर दी।