प्रसिद्ध हिंदू-मुस्लिम एकता मेला; कही पशुओं का आकर्षण तो कही अव्यवस्था का आलम

बिल्हौर ब्रेकिंग न्यूज़ खय्याम अहमद जाफरी की रिपोर्ट मकनपुर। मेले मे घोड़ा, खच्चर, भैंस, गदहा, बकरी, गाय आदि पशुओं की खरीद-बिक्री शुरू हो गई है। इसके अलावा पशुओं से जुड़े सामान व किसानों के उपयोग वाली वस्तुओं की दुकानें सज गई हैं। जबकि, बद्दउद्दीन जिंदाशाह मदार की दरगाह पर बड़ी संख्या में जायरीनों द्वारा चादरपोशी
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प्रसिद्ध हिंदू-मुस्लिम एकता मेला; कही पशुओं का आकर्षण तो कही अव्यवस्था का आलम

बिल्हौर ब्रेकिंग न्यूज़

खय्याम अहमद जाफरी की रिपोर्ट 

मकनपुर।  मेले मे घोड़ा, खच्चर, भैंस, गदहा, बकरी, गाय आदि पशुओं की खरीद-बिक्री शुरू हो गई है। इसके अलावा पशुओं से जुड़े सामान व किसानों के उपयोग वाली वस्तुओं की दुकानें सज गई हैं। जबकि, बद्दउद्दीन जिंदाशाह मदार की दरगाह पर बड़ी संख्या में जायरीनों द्वारा चादरपोशी और रश्म अदायगी का सिलसिला जारी है ।प्रसिद्ध हिंदू-मुस्लिम एकता मेला; कही पशुओं का आकर्षण तो कही अव्यवस्था का आलम

मकनपुर कस्बे में सजे मेले में बड़ी संख्या में पशु क्रेता – विक्रेता उमड़े। अलीगढ़, सहारनपुर, मेरठ, बिजनौर, बागपत सहित कई पश्चिमी जिलों से घोड़ा व्यापारी घोड़ा खरीद-बिक्री के लिए पहुंच रहे हैं। किसान और ग्रामीण गाय, बकरी और भैंस की खरीद-फरोख्त के लिए जा रहे हैं। मेला कमेटी के इमरान शिकोह, रामचंद्र पाल, सौरभ, जफर हसन, रहबर अली आदि ने बताया कि बसंत पंचमी के मौके पर मेला पूरे शबाब पर होगा। जायरीनों के लिए मुसाफिर खाना और अन्य स्थानों पर ठहरने का विशेष प्रबंध करेंगे। ग्राम प्रधान पति मजाहिर हुसैन ने बताया कि मेला में आने वाली भीड़ को देखते हुए पंचायत भवन, प्राथमिक और जूनियर स्कूल के अलावा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की साफ-सफाई करवाकर लोगों को रोकने के प्रबंध किए जा रहे हैं।

इस बार मेले मे आए पशुओं मे एक घोड़े की चर्चा खूब हो रही है । बताते है कि इस घोड़े की कीमत इक्कीस लाख रुपये लगाई गई है जिसके खरीदार  अब तक बारह लाख तक की पेशकश कर चुके है । देखिए ये वीडियो  –

बिल्हौर क्षेत्र के मकनपुर कस्बे में चल रहे पशु मेले के दौरान आए हुए बाहर से पुलिसकर्मियों के लिए नहीं है अलाव की व्यवस्था जिससे अपनी ड्यूटी पर कार्यरत पुलिसकर्मी को काफी परेशानी हो रही है ।

बता दें कि अभी यहां उर्स का ऐतिहासिक मेला समाप्त हुआ । जिसमे यहां आनेवाले दर्शनार्थी को निकटवर्ती नहर मे स्नान करने की परंपरा है,  मे प्रशासन ने पानी नही छोडा । इससे जहां आने वाले श्रद्धालु की धार्मिक विश्वास को ठेस पहुंची वही सुविधा के लिहाज से लाखों दर्शनार्थी को दैनिक सुविधा का कितना  अभाव खला होगा ये अंदाजा लगाया जा सकता है ।

जहां शीतलहर सर्दी के कारण रात में ठिठुरने पर मजबूर मेला प्रशासन आंखों में पट्टी बांधे बैठे हुए।