गंगा की लहरों की आवाज तो सुनाई देगी लेकिन भक्तों की तालियों की गड़गड़ाहट नहीं

रश्मि प्रभा की उपलब्धि उत्तरकाशी: माँ गंगा के कपाट उद्घाटन समारोह में इस बार नजारा बिल्कुल अलग दिखाई देगा। गंगा की लहरों की आवाज तो वैसे ही सुनाई देगी लेकिन भक्तों की तालियां और जयकारे इस बार सुनाई नहीं देंगे। गंगोत्री धाम के कपाट उद्घाटन समारोह के इतिहास में शायद यह पहला मौका होगा जब श्रद्धालुओं
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गंगा की लहरों की आवाज तो सुनाई देगी लेकिन भक्तों की तालियों की गड़गड़ाहट नहीं

रश्मि प्रभा की उपलब्धि

उत्तरकाशी: माँ गंगा के कपाट उद्घाटन समारोह में इस बार नजारा बिल्कुल अलग दिखाई देगा। गंगा की लहरों की आवाज तो वैसे ही सुनाई देगी लेकिन भक्तों की तालियां और जयकारे इस बार सुनाई नहीं देंगे। गंगोत्री धाम के कपाट उद्घाटन समारोह के इतिहास में शायद यह पहला मौका होगा जब श्रद्धालुओं के साथ आर्मी बैंड मौजूद नहीं रहेगा।

मां गंगा के शीतकालीन स्थल मुखवा गांव से पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ स्थानीय लोग हर साल उनकी डोली लेकर गंगोत्री धाम जाते हैं। लेकिन इस बार प्रशासन ने मात्र 21 लोगों को इस यात्रा में शामिल होने की अनुमति दी है। सदियों से स्थानीय लोग मां गंगा को अपनी बेटी के रूप में पूजते हैं और उन्हें छोड़ने के लिए गंगोत्री धाम पहुंचते हैं। इस दौरान सभी की आंखें नम हो जाती हैं।

लेकिन कोरोना संकट के कारण इस बार स्थानीय लोग गांव से ही मां गंगा को विदाई देंगे। इस बार गंगोत्री के आसपास काफी विशालकाय ग्लेशियर भी हैं और बर्फ भी काफी ज्यादा है। गंगोत्री धाम के कपाट 26 अप्रैल को खुलेंगे. 25 अप्रैल को मां गंगा की डोली मुखवा गांव से 12 बजे निकलेगी ओर भैरोंघाटी में रात्री विश्राम के बाद 26 अप्रैल को 12:35 पर गंगोत्री धाम का कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया जाएगा।

यमुनोत्री धाम और गंगोत्री धाम के कपाट अक्षय तृतीया के दिन खोले जाते हैं। यमुनोत्री धाम के कपाट भी 26 अप्रैल को खुलेंगे और इसी दिन से चार धाम यात्रा का आगाज हो जाएगा। मां यमुनोत्री 26 अप्रैल को यमुनोत्री धाम के लिए रवाना होंगी। कपाट उद्घाटन के दिन यमुनोत्री धाम में भी सीमित लोग ही मौजूद रहेंगे. मंदिर समिति और प्रशासन की देखरेख में यमुनोत्री धाम के कपाट खोले जाएंगे।