जिले की औद्योगिक इकाईयाँ संवेदनशून्य ,कोरोना काल में सहयोग के लिए सामने न आना निंदाजनक - प्रशांत सिंह ठाकुर।

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जिले की औद्योगिक इकाईयाँ संवेदनशून्य ,कोरोना काल में सहयोग के लिए सामने न आना निंदाजनक - प्रशांत सिंह ठाकुर।

लव कौशिक की रिपोर्ट

जांजगीर-चाम्पा -जिले में कोरोना सम्बन्धी आंकड़े लगातार बढ़ रहे हैं । जिले के चारों नगर पालिका क्षेत्र सर्वाधिक प्रभावित हैं । प्रतिदिन सैकड़ों प्रकरण सामने आ रहे हैं।  

इन परिस्थितियों से निपटने संसाधन का अभाव देखा जा रहा है तथा व्यवस्था सम्बन्धी कमी को दूर करने जन सहयोग लेना पड़ रहा है। जिले के जागरूक नागरिक और सेवा भावी संगठनों द्वारा इसमें अपनी क्षमता अनुकूल  सक्रिय सहभाग निभाया भी जा रहा है, परन्तु जिले में स्थापित औद्योगिक संगठन हाथ खींचकर बैठे हैं। यह बेहद दुर्भाग्यजनक है कि जिस जिले की भूमि, पानी का उपयोग कर ये अपनी जेब भर रहे उनकी जरूरत के समय ये गायब हैं। 

उनके असहयोगात्मक और अमानवीय रवैये के विरोध में भाजपा नेता प्रशांत सिंह ठाकुर ने पुतला जलाकर विरोध जताया

लॉकडाउन होने के कारण उन्होंने अपने निवास में ही औद्योगिक संगठनों का प्रतीक स्वरूप पुतला जलाकर विरोध किया।

इन विषय पर उन्होंने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि "जांजगीर -चाम्पा जिले से सर्वाधिक मजदूर कमाने -खाने के लिए बाहर जाते हैं। अभी उनका आना शुरू हुआ है। ऐसे में पहले से ही बदहाल व्यवस्था में महामारी का सामना यह जिला कैसे करेगा। 
 जिले में कोरोना के सक्रिय मामले लगातार बढ़ रहे हैं। मौत के मामले में यह जिला प्रदेश में पांचवे स्थान पर है। संक्रमण सम्बन्धी गम्भीर और लगातार बढ़ रहे मामलों के बीच हमारी तैयारी अपर्याप्त है। जिले में ऑक्सीजन युक्त बेड की संख्या मात्र 185 है। व्यवस्था सम्बन्धी परेशानी को दूर करने जिले की औद्योगिक इकाइयों को सामने आना चाहिए, परन्तु यह खेद का विषय है कि दो दर्जन से अधिक बड़े उद्योग होने के बाद भी सहयोग के मामले में ये सब लापता हैं। 

जिला मुख्यालय जांजगीर में ही दिन भर कोयले लदी सैकड़ों गाड़ियां चलती है। रेक प्वांइट, कोल वाशरी,डोलोमाइट, खदान, सीमेंट,पावर प्लांट,आयरन, पेपर जैसी बड़ी महत्वपूर्ण इकाइयां इन जिले का शोषण ही कर रही हैं। पैसे कमाकर इस जिले को ये धूल और प्रदूषण ही दे रहे। संकट के समय में जब इनके सहयोग की जरूरत है तब ये आंख-कान बंद करके बैठे हैं। 
इनकी आत्मा मर चुकी है, इनका व्यवहार घोर निराशाजनक और विरोध योग्य है।"