बदहाली का रोना रो रही है बालोद जिला का जिला अस्पताल, भगवान भरोसे चल रहा हॉस्पिटल

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छत्तीसगढ़

हेमंत कुमार साहू की रिपोर्ट

वार्ड बॉय भरोसे चल रहा हॉस्पिटल

मालूम चला एक लिफ्ट हमेशा बंद रहता है, सिर्फ दिखाने के लिफ्ट लगाया गया है 
 डॉक्टर के आने का कोई समय फिक्स नही ।महिला प्रसाधन कक्ष का उपयोग बिंदास पुरुष कर रहे है ।तनख्वाह सरकार की ले रहे है, मरीजो को प्राइवेट क्लिनिक बुला रहे है।

जिला अस्पताल को ई-अस्पताल का दर्जा मिला है। डॉक्टर को भगवान का दर्जा मिला है, किन्तु इन दिनों यह अस्पताल बदहाली के दौर से गुजर रहा है। यहाँ जाने पर ना कोई डॉक्टर रहता है, ना ही कोई त्वरित इलाज होता है, डॉक्टर तो लूट का धंधा बना रखे है ,कई ऐसे डॉक्टर है, जो नाम मात्र अस्पताल में बैठते है और अपना पर्सनल क्लिनिक खोल कर बैठे है या किसी मेडिकल वालो ने कमिशन बेस में डॉक्टर को बैठा रखा है । हाँ हम बात कर रहे है बालोद के जिला अस्पताल की, जहाँ की बदहाली का रोना हॉस्पिटल की  व्यस्था से पता चल जाता है ।

हॉस्पिटल जाने पर OPD से पर्ची कटाने पर OPD से कहां जाता है, डॉक्टर नही आये है, डॉक्टर आये होंगे तो देख लो फिर पर्ची काट लेंगे 

जैसे तैसे कोई 11 बजे डॉक्टर आये, जब डॉक्टर से पूछा गया, सर जी ENT वाले डॉक्टर साव नही आ रहे है क्या, बाजु के केबिन वालो को ही पता नही था, डॉक्टर साहब आ रहे है या नही, 11.15 बजे तक इंतजार करने के बाद सिविल सर्जन डॉ. देवदास से डॉक्टर की जानकारी लेने पर कहाँ जाता है उनका अभी कोविड में डयूटी लगा है, अभी कुछ नही हो पाएगा, आप वार्ड बॉय सिन्हा के पास जाये, उनको सब आता है, वो सब ठीक कर देंगे । सिन्हा से मिलने के बाद डॉ मेरिया से मिल लीजियेगा ।

वार्ड बॉय के भरोसे चल रहा है हॉस्पिटल

जैसा कि डॉ देवदास ने कहां, ENT का सारा काम वार्ड बॉय देख रहा है, उनके पास जाने से उन्होंने अपने तरीके से कोशिस की, कुछ सफलता तो नही मिली, फिर डॉ मेरिया के पास चले गए, उन्होंने डॉ. एन. के. साहू के पास भेज दिया, उनके पास बड़ी उम्मीद लेकर चले तो गए, डॉ साहेब को समस्या बताया, उन्होंने कहाँ, थोड़ा इंतज़ार कीजिए, इंतज़ार करते समय वहां बैठे तो देखा कि महिला प्रसाधन का उपयोग पुरुष धड़ल्ले से कर रहे है, हॉस्पिटल प्रबंधन से इस विषय मे बात करने पर कोविड का हवाला देते है, जब हमारी टीम द्वारा वहाँ देखा गया तो पता चला कि वहाँ ना ठीक से पानी आता है, ना ही साफ सफाई है । बाथरूम से पानी भी बाहर नही होता, महिला प्रसाधन में पूरा पानी भरा हुआ है, जो कि हॉस्पिटल प्रबंधन पर घोर लाफ़रवाही प्रतीत होता है । अब इंतज़ार करते साहू सर को कहे सर कोविड का समय है, भीड़ बढ़ रही है, जल्दी देख लीजिए, उन्होंने सुबह 11.30 से इंतज़ार कराते लकभग 12.45 कर दिए, ना छूवे, ना बात की,अंत मे आकर कहे, भाई साहब मैं ईलाज़ नही कर पाऊंगा, आप धमतरी या दुर्ग चले जाइये । अब यदि डॉक्टर साहब को देखना नही था तो रोकना भी नही था, फालतू हॉस्पिटल में भीड़ बढ़ाने से क्या मतलब और जब धमतरी ही भेजना था तो 12.45 को क्यों बताया, मरीज चाहकर धमतरी नही जा पाएगा, क्योंकि धमतरी जाने में कम से कम 1-30 घंटे लग जाता है और अभी लॉक डाउन है क्लिनिक और लकभग सभी डॉक्टर भी दोपहर बाद क्लिनिक बंद कर देते है । आखिर सवाल ये उठता है, डॉ एन. के. साहू चाहते क्या थे, इतना लंबा इंतजार करना, फिर ना करूँगा कहना, ताकि मरीज परेशान हो, ना खुद इलाज करे, ना ही समय मे दूसरे हॉस्पिटल पहुच पाए । 

सारी अव्यवस्था के बारे में बात करने पर क्या करे साहू जी, कोविड का समय चल रहा है, हमको फण्ड भी नही आ रहा है, हम तो खुद ऑक्सिजन भराने के लिए CHMO से फण्ड मांगते है, ऑक्सिजन भी सब उधारी से भर रहा है, ऐसे समय मे हम क्या कर सकते है -

डॉ. देवदास, सिविल सर्जन, जिला हॉस्पिटल बालोद