कल किसी नेआपकी जान बचायी, आज आपकी बारी हैं ( प्लाज्मा दान पर विशेष)

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कल किसी नेआपकी जान बचायी, आज आपकी बारी हैं ( प्लाज्मा दान पर विशेष)


निकुंज गर्ग की रिपोर्ट
कोरोना वायरस अपना विकराल रूप दिखा रहा है। संक्रमण की दूसरी लहर से न केवल पुरे विश्व बल्कि देशभर में बड़ी संख्या में लोग संक्रमित हो रहे हैं। इस बीच लोगों को दवाओं के साथ ही वेंटिलेटर और ऑक्सीजन की ज़रूरत पड़ रही है। साथ ही कोरोना पर जीत हासिल कर चुके मरीजों के प्लाज्मा की भी मांग बढ़ी है। यह पाया गया है कि प्लाज़्मा से कोरोना संक्रमितों की जान बचाई जा सकती है। प्लाज्मा बनाया नहीं जा सकता, यह सिर्फ डोनेट ही किया जा सकता है। कोरोना के बढ़ते मामलों के साथ अस्पतालों में मरीजों की हालत किसी से छिपी नहीं है। चिकित्सक जी-जान से मरीजों को जिंदगी के लिए दिन-रात सेवा में जुटे हैं। स्वयं 60 ज्यादा बार रक्तदान कर चुके रक्तदान और नेत्रदान मुहिम से जुड़े पलवल डोनर्स क्लब ज्योतिपुंज के मुख्य संयोजक आर्यवीर लाॅयन विकास मित्तल ने बताया कि इस समय रक्तदान की तरह ही प्लाज्मा दान के लिए जागरूकता लानी होगी ।कोरोना को मात दे चुके विजेताओं के हाथ में अब दूसरों की जिंदगी बचाने का मौका है। ऐसे लोग जो हाल ही में कोरोना से उबरे हैं, उनके शरीर में मौजूद इम्यून सिस्टम ऐसी एंटीबॉडी बनाता है, जो शरीर में ताउम्र रहते हैं और इस वायरस से लड़ने में समर्थ बनाते हैं। ये एंटीबॉडी प्लाज्मा में मौजूद रहते हैं। ऐसे कोरोना विजेताओं के प्लाज्मा को कोविड के गंभीर रोगियों को देकर उनकी जान बचाई जा सकती है। मगर, जागरूकता की कमी के चलते लोग प्लाज्मा दान करने से परहेज कर रहे हैं।ज्यादातर लोग अब भी प्लाज्मा डोनेशन को लेकर झिझक रहे हैं। उन्हें यह डर है कि अभी तो कोरोना जैसी जानलेवा बीमारी से ठीक हए हैं।फिर अस्पताल जाने पर कहीं दोबारा कोरोना अपनी चपेट में न ले ले। कई लोगों का परिवार तैयार नहीं होता।इसका मुख्य कारण यह हैं कि इसको लेकर कोई विशेष जागरूकता कार्यक्रम नहीं चलाए गये।जैसे रक्तदान को लेकर विभिन्न आयोजन होते हैं और शिविर लगाए जाते हैं, उसी प्रकार का प्रयास प्लाज्मा डोनेट करवाने को नहीं किया गया। लोगों में अभी इस समझ की भी कमी है कि प्लाज्मा डोनेट करना, रक्तदान के समान ही है। कुछ अनिष्ट की आशंका ही व्यक्ति को अच्छा करने से डराती है। इस डर को पहले खत्म करना होगा। स्वयं 40 से ज्यादा बार रक्तदान कर चुकी क्लब की सहसंयोजक अल्पना मित्तल ने जानकारी देते हुए बताया कि लोगों को यह समझाना होगा कि प्लाज्मा देने के बाद किसी तरह की कमजोरी नहीं आती। डोनेट नहीं करने पर कुछ समय बाद एंटीबॉडी खुद खत्म हो जाती है। ठीक हो चुके व्यक्ति अगर प्लाज्मा डोनेशन करेंगे, तो गंभीर कोरोनो रोगियों को नया जीवन दिया जा सकेगा। कोई भी कोरोना से ठिक हुए व्यक्ति किसी भी सरकारी या सरकार  द्धारा पंजीकृत प्लाज्मा बैंक में जाकर प्लाज्मा दान किया जा सकता हैं। अच्छी तरह जान लें कि कौन व्यक्ति प्लाज्मा दान करने योग्य है और इसके लिए क्या-क्या चीज़ें जरूरी होती हैं। 
कोरोना रिपोर्ट निगेटिव आने के 14 दिन बाद प्लाज्मा डोनेट किया जा सकता है।  कोविड में खांसी, बुखार, सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षण वाले लोगों में एंटीबॉडीज ज्यादा होती है। तो इन लोगों की एंटीबॉडी ज्यादा फायदेमंद होती है। ध्यान रखें कोविड रिकवरी के बाद अगर आपका वजन 50 किलो से ज्यादा हो और उम्र 18 वर्ष से 60 वर्ष तक के बीच हो, तभी आप प्लाज्मा डोनेट करने के योग्य हैं।।गर्भवती महिलाएं प्लाज्मा डोनेट नहीं कर सकती है। प्लाज्मा डोनर में एंटीबॉडीज की मात्रा जानने के लिए उसे एंटीबॉडी का टेस्ट करवना व उसकी रिपोर्ट लाना अनिवार्य है। साथ डोनर के पास कोरोना पॉजिटिव और निगेटिव दोनों रिपोर्ट होना जरुरी है।

आर्यवीर लाॅयन विकास मित्तल
पलवल डोनर्स क्लब ज्योतिपुंज