कोरोना प्रहार से इंसान तबाह तो प्रकृति ले रही अंगड़ाई

रश्मि प्रभा की रिपोर्ट रामनगर नैनीताल कोरोना वायरस जहां मानव जाति के लिए अभिशाप लेकर आया है, वहीं प्रकृति के लिए वरदान नदी, हवा, पानी अचानक सब पहले जैसा होने लगे हैं। जब प्रकृति का इतना दोहन नहीं हुआ था तब विश्व प्रसिद्ध कार्बेट नेशनल पार्क और उसके आसपास के वन्यजीव जंतुओं का जीवन प्रकृति
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कोरोना प्रहार से इंसान तबाह तो प्रकृति ले रही अंगड़ाई

रश्मि प्रभा की रिपोर्ट

रामनगर नैनीताल कोरोना वायरस जहां मानव जाति के लिए अभिशाप लेकर आया है, वहीं प्रकृति के लिए वरदान नदी, हवा, पानी अचानक सब पहले जैसा होने लगे हैं। जब प्रकृति का इतना दोहन नहीं हुआ था तब विश्व प्रसिद्ध कार्बेट नेशनल पार्क और उसके आसपास के वन्यजीव जंतुओं का जीवन प्रकृति के साथ व्यतीत होता था। तब ना होटल, रिजाॅर्ट, बस्ती, डीजे की तेज आवाज, ना वाहनों का शोर, ना ही जंगलों में इंसानी दखल होता था। अब लाॅकडाउन के बाद फिर से वहीं नजारा देखने को मिल रहा है। ऐसा लगता है जैसे सदियों पुरानी दुनिया लौट कर आ गई हो। अब तो जंगल का राजा, हाथियों और हिरणों का झुंड सब लॉकडाउन का जमकर मजा ले रहे हैं। वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर दीप रजवार ने बताया यह लॉकडाउन प्रकृति के लिए वरदान साबित हुआ है। आप घर बैठे चिड़ियों की चहचहाहट आसानी से सुन सकते हैं, जो पहले ध्वनि प्रदूषण की वजह से इतना साफ नहीं सुनाई देती थी वन्यजीवों का आचरण विचरण, जो इंसानी दखल से कम हो गया था, लाॅकडाउन की वजह से प्रकॄति अपने मूल रूप में आ रही है। हम सब इससे सबक ले सकते हैं और कम से कम महीने में 1 दिन संपूर्ण लॉकडाउन करके प्रकृति को होने वाले नुकसान में कमी कर सकते हैं।

 इस पूरी दुनिया में नेचर की खूबसूरती से बढ़कर कुछ ओर नहीं हैं। एक ओर जहां इस वक़्त पूरी दुनिया कोरोना  जैसी भयकंर महामारी से जूझ रही है वहीं इस मुश्किल दौर में एक बार फिर से नेचर के अद्भुत सौन्दर्य का दीदार करने का मौका मिला।

अगर आप किसी बड़े शहर में रहते हो अक्सर आपकी तेजी से पटरियों पर दौड़ती जिंदगी होती होगी। लेकिन आजकल शहरों में भी लोगों की सुबह चिड़ियों की चहचहाहट से होती है। कोयल का कूकना भला किसे पसंद नहीं लेकिन वो भी मुश्किल से सुनाई देती है।

लॉकडाउन की वजह से जहां लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है, वहीं प्रकृति और पर्यावरण को बहुत फायदा पहुंचा। इससे न वायु प्रदूषण फैलने से शहर का वातावरण बिल्कुल साफ हो गया है जिसका असर ये हुआ कि जालंधर से हिमाचल प्रदेश के धौलाधार पहाड़ दिखने लगे हैं।

प्रदूषण के कारण लोगों को कभी पता नहीं चला कि शहर से हिमाचल के पहाड़ देखे जा सकते हैं। लेकिन ऐसे खूबसूरत नजारें दुनिया के कई इलाकों में देखे जा सकते हैं। शहर की दौड़ती-भागती जिंदगी में अब यहां रह रहे लोगों भी प्रकृति की खूबसूरती को बड़े आराम से निहार रहे हैं।

कोरोना प्रहार से इंसान तबाह तो प्रकृति ले रही अंगड़ाई

लॉकडाउन में बड़े-बड़े शहरों एक जगह रूके हुए है जिन शहरों को अपने आधुनिक लाइफस्टाइल के लिए जाना जाता था। आज वो भी बिलकुल अकेले गुमशुम से अपने अतीत में झांक रहे है। इन शहरों के तमाम पार्को और चिडिय़ाघरों में नज़ारा एकदम बदल चुका है।

जैव विविधता की दृष्टि से लॉकडाउन सुखद नेचर के लिए सही साबित हो रहा है। हर शहर में यह सुखद स्थिति महसूस की जा रही है। एक ओर जहां वन्यजीवों के व्यवहार में परिवर्तन महसूस किया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर लोग इस दौर में चहचहाते पक्षियों की आवाज किसी भी इंसान को आनंदित कर सकती है।

लॉकडाउन की वजह से जहां लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है, वहीं प्रकृति और पर्यावरण को बहुत फायदा पहुंचा। इससे न वायु प्रदूषण फैलने से शहर का वातावरण बिल्कुल साफ हो गया है जिसका असर ये हुआ कि जालंधर से हिमाचल प्रदेश के धौलाधार पहाड़ दिखने लगे हैं।

प्रदूषण के कारण लोगों को कभी पता नहीं चला कि शहर से हिमाचल के पहाड़ देखे जा सकते हैं। लेकिन ऐसे खूबसूरत नजारें दुनिया के कई इलाकों में देखे जा सकते हैं। शहर की दौड़ती-भागती जिंदगी में अब यहां रह रहे लोगों भी प्रकृति की खूबसूरती को बड़े आराम से निहार रहे हैं।