बदरी केदार के ऑनलाइन दर्शन करवाने पर हो रहा है विचार

रश्मि प्रभा की रिपोर्ट उत्तराखंड सरकार द्वारा गठित उत्तराखंड चारधाम देवस्थानम बोर्ड के प्रबंधन में पहली बार उत्तराखंड के चारों धामों के कपाट खुलने जा रहे हैं। जिसे लेकर देवस्थानम बोर्ड ने अपनी तैयारियां तेज कर ली हैं। 26 अप्रैल को गंगोत्री एवं यमुनोत्री के तो 29 अप्रैल को बाबा केदार के और 30 अप्रैल
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बदरी केदार के ऑनलाइन दर्शन करवाने पर हो रहा है विचार

रश्मि प्रभा की रिपोर्ट

उत्तराखंड सरकार द्वारा गठित उत्तराखंड चारधाम देवस्थानम बोर्ड के प्रबंधन में पहली बार उत्तराखंड के चारों धामों के कपाट खुलने जा रहे हैं। जिसे लेकर देवस्थानम बोर्ड ने अपनी तैयारियां तेज कर ली हैं। 26 अप्रैल को गंगोत्री एवं यमुनोत्री के तो 29 अप्रैल को बाबा केदार के और 30 अप्रैल को श्री बदरीविशाल के मंदिरों के कपाट दर्शन के लिए खोले जायेंगे। कोरोना संक्रमण के कारण इस वर्ष चारों धामों में तीर्थ यात्रियों के पहुंचने की उम्मीद बहुत कम है। चारों धामों में कपाट खुलते समय मात्र पुजारी, धर्माधिकारी एवं मंदिर के कुछ अधिकारी ही मौजूद रहेंगे।

गढ़वाल कमिश्नर एवं देवस्थान बोर्ड के सीईओ रविनाथ रमन ने ‘हिन्दुस्तान’ को बताया कि सरकार या देवस्थानम बोर्ड बदरीनाथ केदारनाथ में ऑनलाइन पूजा नहीं करवाने जा रहा है। उन्होंने बताया कि बदरी केदार एवं यमुनोत्री गंगोत्री में तय विधान के अनुसार ही पूजा होगी। भक्त बदरी केदार के ऑनलाइन दर्शन कर सकें इस बारे में विचार किया जा रहा है। साथ ही संबन्धित जिलाधिकारियों से इन धामों में नेटवर्क आदि की जानकारियां मांगी गई है।

सीईओ रविनाथ रमन ने बताया कि बदरी केदार के रावलों को उनके प्रदेश से लाने की तैयारियां प्रदेश सरकार ने शुरू कर ली है। इस हेतु संबन्धित राज्यों की सरकारों से वार्ता की जा रही है। कहा कि दोनों धामों के रावल को सड़क या हवाई मार्ग से उत्तराखंड लाने के लिए केन्द्र से बातचीत जारी है।

देवस्थानम बोर्ड के सीईओ रविनाथ रमन ने बीकेटीसी के पूर्व सीईओ बीडी सिंह को बदरीनाथ एवं केदारनाथ धाम के कपाट खुलने की तैयारियां पूरी करने एवं पूजा व्यवस्था के सफल संचालन के लिए आदेशित किया है। इसके बाद बीकेटीसी के पूर्व सीईओ बीडी सिंह मंदिर कर्मचारियों एवं अग्रिम दल के साथ बदरीनाथ पहुंच गए हैं। दल के साथ गए मंदिर के एई विपिन तिवाड़ी ने बताया कि मंदिर के परिक्रमा पथ में अभी भी पांच फीट तक बर्फ मौजूद है जिसे हटाने का काम शुरू कर दिया गया है।

बदरीनाथ धाम में कपाट खुलने में मात्र 13 दिन ही शेष रह गए हैं। ऐसे शुक्रवार को मंदिर समिति के अवर अभियंता गिरीश रावत के नेतृत्व में 18 सदस्यों का दल शुक्रवार को बदरीनाथ धाम पहुंचा। यह दल कपाट खुलने से पूर्व बदरीनाथ मंदिर की सभी व्यवस्थाओं दुरुस्त करेगा। गिरीश रावत ने बताया की 18 सदस्यों में से 10  मजदूर  हैं, जो मंदिर परिसर एवं प्रांगण में जमी बर्फ का हटाने का काम करेंगे सोशल डिस्टेंस समेत सरकार की सभी एडवाइजरी का पालन होगा। 8 सदस्य बिजली, पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं को सुचारू बनाने को बद्रीनाथ पहुंचे हैं। 40 सदस्यों का अग्रिम दल पिछले साल चौदह अप्रैलको बदरीनाथ पहुंचा था।

बदरीनाथ के रावल बदरीनाथ के निकले
बदरीनाथ के रावल ईश्वरी प्रसाद नम्बूदरी ने बदरीनाथ के लिये निकले हैं। रावल गुरुवार को केरल के कन्नूर जिले के अपने गांव चेरुपल्ली से रवाना हो गये हैं। वे सड़क मार्ग से बदरीनाथ आ रहे हैं। बदरीनाथ मंदिर के धर्माधिकारी पंडित भुवन चंद्र उनियाल और ज्योतिष्पीठ के तीर्थ पुरोहित ऋषि प्रसाद सती ने बताया ने बताया कि बदरीनाथ के रावल ईश्वरी प्रसाद नम्बूदरी से हुयी फोन से वार्ता के क्रम में रावल महाराज ने जानकारी दी है कि वे गुरुवार को बदरीनाथ के लिये निकल पड़े हैं और सड़क मार्ग से बदरीनाथ आ रहे हैं।

अखंड ज्योति के दर्शन नहीं कर पाएंगे यात्री
लगभग सौ वर्षों के बाद एक बार फिर से बदरीनाथ के कपाट खुलते समय तीर्थ यात्री अखंड ज्योति के दर्शन नहीं कर पायेंगे। वर्ष 1920 में हैजा महामारी के कारण बदरीधाम के कपाट खुलते समय तीर्थ यात्री यहां नहीं पहुंच सके थे।