स्वास्थ्य कर्मी कद बाद अब, पुलिस कर्मचारियों के अप्रैल माह के वेतन से 1 दिन की राशि कटौती से पुलिस कर्मी में नाराजगी

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स्वास्थ्य कर्मी कद बाद अब, पुलिस कर्मचारियों के अप्रैल माह के वेतन से 1 दिन की राशि कटौती से पुलिस कर्मी में नाराजगी

हेमंत कुमार साहू की रिपोर्ट

मुख्यमंत्री राहत कोष में 1 दिन का वेतन ना कटवाने के लिए बिलासपुर पुलिस कर्मचारियों ने पुलिस अधीक्षक से आग्रह किया। इस आदेश का कॉपी खिलाफ़ सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है ।सोशल मीडिया में वायरल पत्र में पुलिस कर्मचारी जिनमें प्रदीप दिवाकर, दीपक वैष्णव, मानसिंह कुर्रे, अखिलेश बेक, शंभू केवट, हितेंद्र लोनिया, राजीव शांडिल्य, चंद्र प्रकाश भारद्वाज अन्य 64 से अधिक पुलिस आरक्षक कर्मचारियों ने पुलिस अधीक्षक बिलासपुर से सामूहिक लेटर बनाकर 1 दिन का वेतन ना काटने के लिए आग्रह किया है और शासन-प्रशासन के तानाशाही आदेश पर असहमति जताई है।लेटर में दर्शाया गया है कि पुलिस कर्मचारी 2-2 लोन लेकर जीवन यापन कर रहे हैं और 1 दिन का वेतन कटने से उनकी आर्थिक स्थिति खराब हो जाएगी।कोरोनकॉल में 24 घंटे के एग्रीमेंट पर काम करने वाले पुलिस कर्मचारियों के वेतन 1 दिन का वेतन काटना कहीं से सही नहीं है और यदि पुलिस कर्मी विरोध कर रहे है तब तो यह बिल्कुल सही नही है ।आरक्षक प्रदीप दिवाकर ने बताया कि पुलिस कर्मचारियों के वेतन से ₹1 काटने का अधिकार शासन-प्रशासन को नहीं है, फिर भी तानाशाही आदेश के माध्यम से पुलिस कर्मचारियों से बिना सहमति लिये 1 दिन का वेतन काटने के लिए तैयार हो जाते हैं,
आदेश में बिल्कुल लिखा होना चाहिए कि जो स्वेच्छा से मुख्यमंत्री राहत कोष में करोना काल में 1 दिन का वेतन कटवाना चाहते हैं,वो आवेदन दे, लेकिन आदेश इसके विपरीत होता है, आवेदन देने का भी समय नहीं दिया जाता, जब ट्रेजरी में बिल लगने वाला होता है तब आदेश निकाला जाता है।जब तानाशाही आदेश देना ही है तो आदेश में विषय में पुलिस कर्मचारियों की स्वेच्छा राशि शब्द का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।स्वेच्छा राशि शब्द का इस्तेमाल शासन-प्रशासन सवाल से बचने के लिए करती है, क्योंकि पुलिस कर्मचारियों की असहमति होती है।