‘घर घर होगी मधुशाला’ चर्चा है हरियाणा में

ईसम सिंह की रिपोर्ट हिसार। हरियाणा विधानसभा के चालू सत्र में जहां प्रदेश की आबकारी नीति में बनाए गए ‘घर-घर मधुशाला खोलने’ के प्रावधान पर बहस हो रही है वहीं रोचक है कि इस नीति को राजस्व के लालच में हर सरकार बढ़ावा देती आई है। विभिन्न अध्ययनों के मुताबिक शराब के कारण कई घर टूटते
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ईसम सिंह की रिपोर्ट

हिसार। हरियाणा विधानसभा के चालू सत्र में जहां प्रदेश की आबकारी नीति में बनाए गए ‘घर-घर मधुशाला खोलने’ के प्रावधान पर बहस हो रही है वहीं रोचक है कि इस नीति को राजस्व के लालच में हर सरकार बढ़ावा देती आई है। विभिन्न अध्ययनों के मुताबिक शराब के कारण कई घर टूटते हैं।

दरअसल, आबकारी एवं कराधान विभाग संभालने वाले उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला द्वारा हाल ही में जारी की गई आबकारी नीति (एक्साइज पॉलिसी) के एल-50 (घर का निजी बार) को लेकर बवाल शुरू हुआ तो  आबकारी नीति पर अध्ययन किया। विभाग की वेबसाइट पर वर्ष 2007 से अब तक की आबकारी नीति मिल गई। इन सभी में एल-50 लाइसेंस देने का प्रावधान है।
दूसरी तरफ, आम आदमी को शराब की एक बोतल घर पर रखने का अधिकार अंग्रेजों द्वारा वर्ष 1914 में बनाए गए आबकारी अधिनियम की धारा 24 में के तहत दिया गया। इसी के तहत आबकारी नीति में प्रावधान किया गया है कि कोई भी व्यक्ति बिना एल-50 लाइसेंस के छह बोतल देसी शराब, छह बोतल आईएफएल (भारतीय विदेशी शराब), 12 बोतल आईएमएफएल (भारतीय निर्मित विदेशी शराब), 12 बोतल बीयर, छह बोतल रम, 12 बोतल वाइन, छह बोतल वोदका या जिन या साइडर रख सकता है। हालांकि रक्षाकर्मियों के लिए यह सीमा सेना के अधिकारियों द्वारा निर्धारित की जाती है। बिना किसी लाइसेंस के इससे ज्यादा मात्रा में शराब पाई जाती है तो मामला शराब तस्करी का माना जाता है। इसी मात्रा को बढ़ाने के लिए एल-50 लाइसेंस दिया जाता है।
हिसार के डीईटीसी (उप आबकारी एवं कराधान आयुक्त) विजय कौशिक ने बताय कि आबकारी नीति के प्रावधान के तहत एल-50 लाइसेंस धारक अपने पास 12 बोतल देसी शराब, छह बोतल आईएफएल (भारतीय विदेशी शराब), 24 बोतल आईएमएफएल (भारतीय निर्मित विदेशी शराब), 24 बोतल बीयर, 12 बोतल रम, 24 बोतल वाइन, 12 बोतल वोदका या जिन या साइडर रख सकता है।

2007 से एल-50 का यह रहा है प्रावधान
वेबसाइट पर उपलब्ध आबकारी नीति के अनुसार वर्ष 2007-08 की आबकारी नीति के तहत 500 रुपये में एल-50 लाइसेंस एक साल के लिए व 5000 रुपये में दस साल के लिए जारी किया जाता था। वर्ष 2008-09 में 2000 रुपये में आजीवन व 200 रुपये में एक साल के लिए यह लाइसेंस देने का प्रावधान किया गया। यह प्रावधान वर्ष 2015-16 तक जारी रहा। वर्ष 2016-17 में 1500 रुपये में एक साल के लिए व अधिकतम दस साल के लिए लाइसेंस जारी करने का प्रावधान किया गया। वर्ष 2017-18 में 1500 रुपये में एक साल व 20 हजार में आजीवन लाइसेंस जारी करने का प्रावधान किया गया। वर्ष 2019-20 की नीति में आजीवन लाइसेंस की फीस 20 हजार रुपये से घटाकर 10 हजार रुपये कर दी गई। उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने पूर्व वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु द्वारा बनाए गए प्रावधान को हूबहू रखा है।