१२० साल पुराना मंदिर टूटा, गलत सूचना से विवाद, पुलिस के दखल से सुलझा मामला

ठाकुर राजबेन की रिपोर्ट ठाकुरद्वारा-जिला के उपमंडल इंदौरा के अधीन पड़ते गांव हगवाल में 120 साल पुराना माता का मंदिर गिराने पर कुछ घंटे काफी तनाव के हालात रहे। हालांकि पुलिस के हस्तक्षेप करने के बाद वहां स्थिति में सुधार हुआ और ग्रामीण नए सिरे से मंदिर बनाने को राजी हो गए। जानकारी के मुताबिक
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ठाकुरद्वारा-जिला के उपमंडल इंदौरा के अधीन पड़ते गांव हगवाल में 120 साल पुराना माता का मंदिर गिराने पर कुछ घंटे काफी तनाव के हालात रहे। हालांकि पुलिस के हस्तक्षेप करने के बाद वहां स्थिति में सुधार हुआ और ग्रामीण नए सिरे से मंदिर बनाने को राजी हो गए। जानकारी के मुताबिक इस मंदिर से करीब 300 मीटर दूरी पर कुटिया बनाकर रह रहे एक साधु और कुछ ग्रामीणों ने शुक्रवार को मंदिर नए सिरे से बनाने के लिए पुराने भवन को गिरा दिया। इस दौरान ऐसी अफवाह फैली कि साधु बाबा की कुटिया में माथा टेकने आने वाले कुछ लोगों ने बाबा के इशारे पर मंदिर को ढहा दिया। मंदिर तोड़े जाने की बात पूरे क्षेत्र में आग की तरह फैल गई और सैकड़ों लोग घटनास्थल पर इकट्ठे हो गए और स्थिति तनावपूर्ण हो गई। घटना की सूचना मिलते ही डमटाल थाना से पुलिस घटनास्थल पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। डमटाल थाना प्रभारी हरीश गुलेरिया ने बताया कि कुछ लोगों की तरफ से गांव हगवाल स्थित सैकड़ों साल पुराने कुट्टा वाली माता मंदिर को गिराया गया है। पुलिस ने छानबीन के बाद पाया कि साधु ने कुछ लोगों की सहायता से मंदिर को इसलिए गिराया कि वहां नए सिरे मंदिर का निर्माण किया जा सके। कुछ लोगों को इस बात की जानकारी नहीं थी, इसलिए विवाद हुआ, लेकिन अब स्थिति काबू में और सबकी सहमति से नए मंदिर का निर्माण किया जाएगा। बता दें कि कुट्टा वाली माता मंदिर श्रद्धालु कमेटी के प्रधान ठाकुर मस्तान सिंह के अनुसार यह मंदिर गरीब 120 वर्ष पुराना है। इस स्थान पर वटवृक्ष के नीचे माता की पिंडी भू प्रकट हुई थी, जिसके बाद स्थानीय लोग माता की पिंडी पर पूजा अर्चना करने आते थे। मनोकामनाएं पूरी होने के बाद सैकड़ों श्रद्धालुओं की आस्था इस मंदिर के साथ जुड़ गई। धीरे-धीरे श्रद्धालुओं के सहयोग से माता की पिंडी वाले स्थान पर पक्के मंदिर का निर्माण करवाया गया। मंदिर में अप्रैल माह के पहले मंगलवार को वार्षिक धार्मिक कार्यक्त्रम व भंडारा करवाया जाता है। इस दिन मंदिर में क्षेत्र के 20 से 30 हजार श्रद्धालु भगत माथा टेकने पहुंचते हैं।