मौसम की नीयत हो रही बेईमान…

मनोज उनियाल की रिपोर्ट शिमला-हिमाचल में मौसम के तेवर अभी और कड़े रहने वाले है। ऊंचाई व मध्य पर्वतीय क्षेत्रों में इंद्र देव अभी और दिन अपना रंग दिखाएंगे। मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार राज्य के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में दो अप्रैल तक मौसम खराब रहेगा। हालांकि इस दौरान 30 मार्च तक ऊंचाई वाले क्षेत्रों
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मौसम की नीयत हो रही बेईमान…

मनोज उनियाल की रिपोर्ट

शिमला-हिमाचल में मौसम के तेवर अभी और कड़े रहने वाले है। ऊंचाई व मध्य पर्वतीय क्षेत्रों में इंद्र देव अभी और दिन अपना रंग दिखाएंगे। मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार राज्य के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में दो अप्रैल तक मौसम खराब रहेगा। हालांकि इस दौरान 30 मार्च तक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में केवल बादल ही छाए रहेंगे। वहीं, उसके बाद एक बार फिर पश्चिम विक्षोभ के सक्रिय होने से 31 मार्च से दो अप्रैल तक पूरे हिमाचल में बारिश व बर्फबारी की आशंका विभाग की ओर से जताई गई है। अगर मैदानी क्षेत्रों की बात करें, तो शनिवार को मौसम बिल्कुल साफ रहेगा। 29 मार्च के बाद मैदानी इलाकों में भी दो मार्च तक मौसम खराब रहने की संभावना जताई गई है। गौर हो कि मार्च भी खत्म होने को है, लेकिन राजधानी सहित राज्य की तमाम जगहों पर अभी भी ठंड जाने का नाम नहीं ले रही है। ऐसे में लोगों की दिक्कतें भी बढ़ गई हैं, वहीं बेमौसमी बारिश से वायरल का खतरा भी बढ़ गया है। फिलहाल शुक्रवार की बात करें, तो राजधानी शिमला सहित कई जगह दोपहर तक हल्की बारिश रिकॉर्ड की गई।

मौसम जितना गर्म, उतना ही कम फैलेगा संक्रमण

मौसम की नीयत हो रही बेईमान…

दुनियाभर में कोरोनावायरस पर तापमान के असर को लेकर डॉक्टरों और विशेषज्ञों ने कई दावे किए हैं। अब अमरीका की मैसाच्युसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ  टेक्नोलॉजी (एमआईटी) के वैज्ञानिकों ने बताया है कि मौसम जितना ज्यादा गर्म होगा और हवा में जितनी ज्यादा नमी होगी, संक्रमण उतना ही कम फैलेगा। इस दावे के अनुसार जिन देशों में नमी ज्यादा है, अभी तक वहां वायरस का संक्रमण कम फैला है। वैज्ञानिकों ने दुनिया के कई हिस्सों से कोरोना संक्रमण का डेटा इकट्ठा कर उसकी दो पैरामीटर तापमान और नमी से तुलना की। इससे पता चला कि वायरस का 90 फीसदी संक्रमण 3 से 17 डिग्री सेल्सियस के बीच के तापमान वाले क्षेत्रों (स्पेन, इटली, ब्रिटेन आदि) में हुआ। एमआईटी के वैज्ञानिकों के अनुसार ऐसे देश जहां पर तापमान 18 डिग्री सेल्सियस और नमी ज्यादा है, वहां पर संक्रमण के 6 फीसद मामले कम आए हैं। वैज्ञानिकों ने बताया कि जब कोरोना वायरस से संक्रमित कोई व्यक्ति खांसता या छींकता है, तो उसके थूक के बेहद बारीक कण हवा में फैल जाते हैं। इन्हीं कणों के जरिए संक्रमण फैलता है। व्यक्ति के छींकने पर एक वक्त पर थूक के 3,000 से अधिक कण निकलते हैं। नमी होने पर हवा संघनित होती है और ऐसे में उसमें किसी की वायरस या बैक्टीरिया का संचरण बहुत दूर तक नहीं हो पाता है। उदाहरण के तौर पर ऐसे समझिए- कि एक कमरे में हवा है और उसमें नमी नहीं है। ऐसे में हवा हल्की हो जाएगी। यदि हवा में वाष्प शामिल हो जाएगी, तो उसमें नमी आ जाएगी, ऐसे में वह भारी हो जाएगी। हल्की हवा में कोई भी वायरस या बैक्टीरिया दूर तक पहुंचता है। वहीं, भारी हवा में यह एक सीमा से आगे नहीं बढ़ पाता है। कोविड-19 एक रेस्पिरेटरी वायरस है। इस तरह के वायरस ज्यादातर सर्दियों में पनपते है और गर्मियों में खत्म हो जाते हैं। गर्मी से वायरस के मरने का कोई ठोस सुबूत तो नहीं हैं। लेकिन, पिछली कुछ बीमारियों में इसका असर देखा गया है। 2002 के नवंबर में सार्स महामारी शुरू हुई थी, जो जुलाई में खत्म हो गई थी। लेकिन, ये तापमान बदलने की वजह से हुआ यह कहना मुश्किल है।

…इसलिए बचे हैं एशिया के देश

वैज्ञानिकों ने अपने विश्लेषण के आधार पर पाया कि कई एशियाई देशों में संक्रमण फैलने की दर बाकी देशों जितनी तेज नहीं है। इन देशों में वेस्टर्न डिस्टर्बेंस की वजह से नमी आई है। आमतौर पर विंटर मानसून फरवरी से पहले खत्म हो जाता है। लेकिन, वेस्टर्न डिस्टर्बेंस से काफी समय बाद तक बारिश होती रहती है। वैज्ञानिकों ने यह भी कहा कि भारत, पाकिस्तान, इंडोनेशिया और अफ्रीका के देशों में कम संख्या में कोरोना टेस्ट होना बहस का मुद्दा बन सकता है। लेकिन, कई देश जैसे सिंगापुर, यूएई और सऊदी अरब में अमरीका, इटली की तुलना में कहीं ज्यादा टेस्ट किए। इसके बावजूद यहां संक्रमण के उतने मामले सामने नहीं आए। वैज्ञानिकों ने कहा कि कम टेस्ट होना कोई मुद्दा नहीं है। साथ ही, कम कनेक्टिविटी की बात भी निराधार है। कम संक्रमण वाले कई देश ट्रैवल हब भी हैं और हजारों लोग यहां रोजाना प्रवेश करते हैं।