बॉल पेंटिंग को नई पहचान देने की कोशिश : ‘असां पहाड़ी, पशुआं ने करदे प्यार बड़ा भारी’

आशीष कुमार की रिपोर्ट पालमपुर । ‘असां पहाड़ी, पशुआं ने करदे प्यार बड़ा भारी’ पालमपुर बाजार में बाईपास पुल के पास एक भवन की दीवार पर बनाई गई नयनाभिराम पेंटिंग के साथ लिखे गए ये शब्द सबका ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं। यह प्रयास बांकी बिट्टी ने किया है। बांकी बिट्टी वही हैं,
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पालमपुर । ‘असां पहाड़ी, पशुआं ने करदे प्यार बड़ा भारी’ पालमपुर बाजार में बाईपास पुल के पास एक भवन की दीवार पर बनाई गई नयनाभिराम पेंटिंग के साथ लिखे गए ये शब्द सबका ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं। यह प्रयास बांकी बिट्टी ने किया है। बांकी बिट्टी वही हैं, जो सोशल नेटवर्क साइट्स पर पहाड़ी भाषा को संजोए रखने का काम कर रही है। क्षेत्र में पहली बार पहाड़ी लाइफ स्टाइल को आकर्षक रूप में पेंटिंग के माध्यम से दर्शाया गया है, जिसमें बॉल पेंटिंग को नई पहचान देने की कोशिश साफ नजर आ रही है। गौर रहे कि अंजलि सोहल ने इंस्टाग्राम व फेसबुक आदि सोशल नेटवर्क साइट्स पर पहाड़ी भाषा को प्रोमोट करने की सोच के तहत बांकी बिट्टी नाम से पेज बनाए थे। बांकी बिट्टी पेज पर पहाड़ी भाषा व संस्कृति से जुड़े स्टेट्स अपडेट किए जाते हैं। अब अंजली सोहल ने अपने मित्र अंद्रेटा निवासी सुशांत के साथ मिलकर इस प्रयास को लोगों तक पहुंचाने की पहल शुरू की है। इस चित्र को तैयार करने में पांच दिन का समय लगा। पहाड़ी जीवनशैली से सरोकार रखती यह पेंटिंग आने-जाने वालों का ध्यान अपनी ओर खींच रही है।