दुनिया की पहली महिला “उस्ताद” हिमाचल प्रदेश की दो बेटियां

मनोज उनियाल की रिपोर्ट शिमला-पुरुष प्रधान समाज के तिलिस्म को तोड़ते हुए पुलिस ट्रेनिंग सेंटर डरोह की दो पुलिस महिला कर्मी ‘उस्ताद’ बन गई हैं। चंबा के सुरंगाणी की अनिता कुमारी और ऊना के लठियाणी की अंजु बाला अब ‘उस्ताद’ बनकर पुरुष व महिला कांस्टेबलों को ट्रेंड करेंगी। पुलिस सिस्टम में प्रशिक्षण देने वाले को
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दुनिया की पहली महिला “उस्ताद” हिमाचल प्रदेश की दो बेटियां

मनोज उनियाल की रिपोर्ट

शिमला-पुरुष प्रधान समाज के तिलिस्म को तोड़ते हुए पुलिस ट्रेनिंग सेंटर डरोह की दो पुलिस महिला कर्मी ‘उस्ताद’ बन गई हैं। चंबा के सुरंगाणी की अनिता कुमारी और ऊना के लठियाणी की अंजु बाला अब ‘उस्ताद’ बनकर पुरुष व महिला कांस्टेबलों को ट्रेंड करेंगी। पुलिस सिस्टम में प्रशिक्षण देने वाले को उस्ताद कहा जाता है। देश-दुनिया में यह तमगा सिर्फ पुरुष पुलिस कर्मियों को हासिल हुआ है। लिहाजा उस्ताद बनकर हिमाचल की इन दोनों बेटियों ने दुनियाभर में अनूठा कीर्तिमान स्थापित किया है। किसी भी देश की महिला पुलिसकर्मियों को अब तक यह तमगा हासिल नहीं हुआ है। इस कारण अनिता कुमारी और अंजु बाला दोनों ने यह इतिहास रचकर अनूठी मिसाल पेश की है। हालांकि इसके पीछे आईजी डा. अतुल फुलझेले का भी महत्त्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने पुरुषों के साथ महिला पुलिस कर्मियों को भी ट्रेनर बनाने के लिए कड़ी मशक्कत की है। नतीजतन अब अनिता कुमारी और अंजू बाला दोनों ही पुलिस जवानों को ट्रेनिंग दे रही हैं। चंबा जिला के दूरदराज सुरंगाणी गांव की अनिता कुमारी की माता गृहिणी और पिता मिस्त्री का काम करते हैं। उनकी दो बहनें और एक छोटा भाई है। लठियाणी गांव की अंजु बाला को यह जज्बा अपने पिता से मिला है। फौज से रिटायर्ड होकर लौटे अंजु बाला के पिता अपनी बेटी को पुलिस अधिकारी बनाना चाहते हैं। इस सपने के साथ उन्होंने अपनी बेटी को पुलिस में भर्ती होने के लिए प्रेरित किया। हिमाचल प्रदेश पुलिस में आरक्षी पद पर भर्ती हुए उम्मीदवारों को शारीरिक रूप से तंदुरुस्त तथा चुस्त बनाकर कुशल एवं जिम्मेदार आरक्षी बनाने के लिए हिमाचल प्रदेश पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय स्थित डरोह, जिला कांगड़ा में आरक्षी मूलभूत प्रशिक्षण कोर्स के दौरान बाह्य प्रशिक्षण अर्थात आउटडोर ट्रेनिंग दी जाती है। प्रशिक्षणार्थियों को बाह्य प्रशिक्षण देने वाले प्रशिक्षकों को प्रशिक्षणार्थियों द्वारा प्यार से ‘उस्ताद’ कहा जाता है। यह प्रायः एक पुरुष-प्रधान क्षेत्र है, क्योंकि अधिकतर पुरुष प्रशिक्षकों द्वारा ही बाह्य प्रशिक्षण करवाया जाता है, परंतु हिमाचल प्रदेश पुलिस ने इस परंपरा को समाप्त करते हुए दो महिला प्रशिक्षकों को भी प्रशिक्षणार्थियों को बाह्य प्रशिक्षण देने के लिए हिमाचल प्रदेश पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय में नियुक्त किया है, जो पुरुषों के कंधे से कंधा मिलाकर प्रशिक्षणार्थियों को बाह्य प्रशिक्षण प्रदान करती हैं। महिला लांस मुख्य आरक्षी अंजू बाला तथा अनिता कुमारी अपनी पूरी लग्न तथा मेहनत का साथ नवनियुक्त रैकरूट आरक्षियों को प्रशिक्षण देने में अपने पुरुष सहयोगियों के साथ कार्य कर रही हैं। पुलिस जवानों को प्रशिक्षण अवधि के दौरान योग अभ्यास, पीईटी, बिना हथियार की लड़ाई (यूएसी), विशेष व्यक्ति सुरक्षा, यातायात प्रबंधन, विस्फोटक एवं बंब निष्क्रियता, दंगा नियंत्रण, क्वायद (ड्रिल), परेड, फील्ड इंजीनियरिंग, गश्त, अंबुश, काउंटर अंबुश, नाकाबंदी, मैप रीडिंग व कमांडो की ट्रेनिंग दी जाती है। वर्तमान समय में हिमाचल प्रदेश पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय में कुल 635 प्रशिक्षणार्थी आरक्षी मूलभूत प्रशिक्षण ग्रहण कर रहे हैं, जिन्हें प्रशिक्षण दिलवाने के लिए करीब 92 पुलिस कर्मियों का प्रदेश भर में चयन किया गया है, इनमें उपरोक्त ये दो महिला पुलिस कर्मी भी शामिल हैं।

ऐतिहासिक स्मारकों में महिलाओं की एंट्री फ्री

नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आठ मार्च को देश में ताजमहल और अन्य प्रमुख ऐतिहासिक स्मारकों में महिलाओं का प्रवेश निःशुल्क कर दिया गया है। केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल ने यह घोषणा करते हुए कहा है कि आठ मार्च को देश और विदेश की सभी महिला पर्यटकों के लिए उन सभी ऐतिहासिक स्मारकों में प्रवेश शुल्क नहीं लगेगा, जहां टिकटों से प्रवेश की व्यवस्था है। उन्होंने कहा कि ताजमहल और लालकिला में महिलाओं के प्रवेश के लिए अलग द्वार की व्यवस्था की गई है।