जिस्म की नुमाइश लगाकर ये लोग मोटी चांदी कूट रहे

मनोज उनियाल की रिपोर्ट गगरेट, हिमाचल। चांदी के सिक्कों की खनक के आगे नैतिक मूल्यों का हनन कैसे हो रहा है इसकी ताजा मिसाल देह व्यापार के मामले ने पेश की है। बेशक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए होटल इंडस्ट्री का अहम योगदान है लेकिन इसी इंडस्ट्री की आड़ में रातों-रात अमीर होने का
 | 
जिस्म की नुमाइश लगाकर ये लोग मोटी चांदी कूट रहे

मनोज उनियाल की रिपोर्ट

गगरेट, हिमाचल। चांदी के सिक्कों की खनक के आगे नैतिक मूल्यों का हनन कैसे हो रहा है इसकी ताजा मिसाल देह व्यापार के मामले ने पेश की है। बेशक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए होटल इंडस्ट्री का अहम योगदान है लेकिन इसी इंडस्ट्री की आड़ में रातों-रात अमीर होने का शौक पालने वाले अनैतिक कार्य करने से भी बाज नहीं आ रहे हैं। गगरेट के एक होटल में पुलिस ने बेशक अब आकर देह व्यापार के धंधे का भंडाफोड़ किया है लेकिन क्या यह कार्रवाई भविष्य में भी जारी रहेगी यह यक्ष प्रश्न बना हुआ है। अन्य राज्यों की युवतियों को आखिर यहां तक कौन लेकर आता है और जिस्मफरोशी के इस धंधे का मुख्य सरगना कौन है, ऐसे कई सवाल हैं जो आम आदमी के दिमाग में भी कौंध रहे हैं। जाहिर है कि ऐसा तो बिलकुल नहीं कि कोई भी होटल मालिक आसानी से युवतियों को यहां ले आए और उन्हें जिस्मफरोशी के धंधे में धकेल दे।

ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि इस धंधे के पीछे कोई मुख्य सरगना और है जो हिमाचल के होटलों तक मजबूर व गरीब घरों की युवतियों को पहुंचा रहा है और इन युवतियों की जिस्म की नुमाइश लगाकर ये लोग मोटी चांदी कूट रहे हैं। बेशक पुलिस ने इस मामले में होटल मालिक को गिरफ्तार कर युवतियों को भी उनके परिजनों के हवाले कर दिया है लेकिन इन्हें इस होटल तक पहुंचाने वाला कौन है उसकी तलाश भी होनी ही चाहिए। हिमाचल जैसे पहाड़ी प्रदेश में पर्यटन व्यवसाय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का अभिन्न अंग है, लेकिन चंद सिक्कों की खनक के लिए जो लोग इन होटल को अय्याशी के अड्डे बना रहे हैं और हिमाचल प्रदेश की संस्कृति को धूमिल कर रहे हैं उनके चेहरों से मुखौटा उठना लाजिमी है। जाहिर है कि अगर पुलिस को यह गुप्त सूचनाएं मिल रही थीं कि उक्त होटल में देह व्यापार का धंधा फलफूल रहा है तो यहां जिस्म की बोली लगाने का यह धंधा लंबे अरसे से चल रहा होगा।
ऐसे में सवाल यह भी है कि आखिर स्थानीय पुलिस की आंखों से यह अपराध कैसे छुपा रहा, जिन युवतियों को इस धंधे में धकेला जाता है उनकी भी कुछ मजबूरियां रही होंगी। ऐसे में क्या ऐसे मामलों को पकड़ने के बाद सिर्फ मामला दर्ज कर लेने से यह अपराध खत्म हो जाएगा। उस जख्म को भी अब ढूंढना होगा जो नासूर बन कुछ इनसानी जिंदगियों को बर्बाद कर रहा है, ताकि ऐसे युवतियां भी सिर उठाकर अपना जीवन यापन कर सकें और उन्हें इस दलदल में धकेलने वाले भी चाहकर उनकी मजबूरी का फायदा न उठा सकें।