गमले में राखी गाड़ने के बाद उग आएगा राखी का पौधा

मनोज उनियाल की रिपोर्ट कुल्लू ।आजके कठिन दौर में जब समस्त वैश्विक महामारी से अपने जीवन को बचाने के जद्दोजहद में है, मास्क व सोशल डिस्टेसिंग का ध्यान रखते हुए घरों से बाहर निकल कर कार्य कर रहे हैं, वहीं घर बैठकर भी महिलाएं कुछ न कुछ कार्य कर समाज को भी प्रेरित करने में
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गमले में राखी गाड़ने के बाद उग आएगा राखी का पौधा

मनोज उनियाल की रिपोर्ट

कुल्लू ।आजके कठिन दौर में जब समस्त वैश्विक महामारी से अपने जीवन को बचाने के जद्दोजहद में है, मास्क व सोशल डिस्टेसिंग का ध्यान रखते हुए घरों से बाहर निकल कर कार्य कर रहे हैं, वहीं घर बैठकर भी महिलाएं कुछ न कुछ कार्य कर समाज को भी प्रेरित करने में पीछे नहीं हैं। हम बात कर रहे हैं मनाली की स्थानीय निवासी पर्यावरण प्रेमी कल्पना ठाकुर की, जो इन दिनों घर बैठे भी लोगों को पर्यावरण को कैसे बचाना है और इस बार राखी का त्योहार खास बनाने के लिए बहनें स्वयं भी राखी तैयार कर अपनी भाई की कलाई में बांध सकती हैं। कल्पना ठाकुर की इस राखी को एक अलग सोच के साथ देख रही है। उन्होंने इस बार पुराने अखबार व मिट्टी के मिश्रण से कुछ ऐसी राखियों को बनाया है कि जब भाई इसे अपनी कलाई से  उतरने के बाद घर के आंगन में  मिट्टी या गमले में गाड़ दे, तो कुछ समय बाद वहां फूल, पौधे व अन्य हरियाली लिए पौधे उग जाएंगे, जिससे आपके घर का आंगन आपकी राखी की सुगंध के साथ वर्षों तक महकता रहेगा। पर्यावरण प्रेमी कल्पना ठाकुर ने कहा कि अखबार व मिट्टी के अलग-अलग मिश्रण को तुलसी, मेथी, गैंदा, ओरिगैनो एब्लू. बेरी इत्यादि के बीजों के साथ गूंध कर कई आकर्षक आकृतियों का रूप दे कर बनाया है। इन्हें उन्होंने वेजीटेबल व अक्रिलिक कलर से सजाया है। उन्होंने मौली की डोरी का उपयोग किया है। कल्पना के अनुसार विधि थोड़ी कठिन है, परंतु यदि घर-घर में इसकी कोशिश की जाए, तो राखी की पवित्रता अपने आसपास के पर्यावरण को भी संतुलित करने में सहायक सिद्ध हो सकती है। कल्पना ठाकुर ने महिलाओं से कहा कि राखी के बंधन को एक पावन मौली के धागे के बंधन से मनाएं।