‘खैरियत’ के जवानो ने बचाई ‘मां’ की जान

अहसान की रिपोर्ट श्रीनगर। कश्मीर में एक गर्भवती महिला को सेना के कल्याणकारी दल ‘खैरियत’ के जवानों ने कमर तक गहरी बर्फ में पैदल चलकर समय पर अस्पताल पहुंचाया, जहां उसने स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया। बारामुला के तंगमर्ग क्षेत्र के दर्द पोरा गांव निवासी रियाज मीर ने मंगलवार को परेशानी की अवस्था में सेना
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‘खैरियत’ के जवानो ने बचाई ‘मां’ की जान

अहसान की रिपोर्ट 

श्रीनगर। कश्मीर में एक गर्भवती महिला को सेना के कल्याणकारी दल ‘खैरियत’ के जवानों ने कमर तक गहरी बर्फ में पैदल चलकर समय पर अस्पताल पहुंचाया, जहां उसने स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया। बारामुला के तंगमर्ग क्षेत्र के दर्द पोरा गांव निवासी रियाज मीर ने मंगलवार को परेशानी की अवस्था में सेना के दल को कॉल कर सूचना दी कि उसकी पत्नी शमीमा को प्रसव पीड़ा हो रही है और उसका परिवार भारी बर्फबारी के कारण अस्पताल ले जाने में असमर्थ हैं। शमीमा और होने वाले बच्चे की जान खतरे में थी।

‘खैरियत’ के जवानो ने बचाई ‘मां’ की जान
उपलोना गांव स्थित सेना के बेस कमांडर बिना समय गंवाए एक स्थानीय चिकित्सा अधिकारी के साथ बर्फ में 5 किलोमीटर पैदल चलकर रियाज मीर के पास पहुंचे। इसके बाद सेना की पूरी इकाई हरकत में आ गई और 3 दल बनाए गए। सेना के एक अधिकारी ने बताया कि एक दल ने महिला के लिए सड़क का रास्ता साफ किया, दूसरे ने हेलिपैड तक बर्फ साफ की और तीसरे ने कनिसपोरा तक बर्फ हटाकर बारामुला जिला मुख्यालय से क्षेत्र को जोड़ने वाला रास्ता साफ किया। सेना के 100 से अधिक जवानों और 25 नागरिकों ने 6 घंटे चले अभियान में हिस्सा लिया। महिला को स्ट्रेचर पर लिटाकर कमर तक गहरी बर्फ में पैदल ही उपलोना तक ले जाया गया। वहां से सेना की एंबुलेंस में एक चिकित्सा अधिकारी के साथ बारामुला अस्पताल भेजा गया। सेना के जवान रास्ते भर एंबुलेंस के आगे बर्फ हटाते रहे। सेना का दल मीर के परिवार के साथ तब तक रहा, जब तक बच्चे का जन्म नहीं हो गया। कश्मीर स्थित पंद्रहवीं कोर के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल के जेएस ढिल्लों ने कहा, ‘सेना के अधिकारियों और जवानों ने महिला को बचाने के लिए बहुआयामी रणनीति अपनाकर प्रशसंनीय कार्य किया है।’