खूब नाचे बजंतरी, ‘राजाधाना री सेरी’ शहनाई पर निकले भगवान नरसिंह

मनोज उनियाल की रिपोर्ट कुल्लू। अंतरराष्ट्रीय दशहरा उत्सव की तीसरी जलेब में खास देवी-देवताओं के बंजतरी खूब नाचे। भगवान नरसिंह की जलेब जैसे-जैसे कालेज रोड होते हुए पहुंच रही थी, तो बजंतरी भी ढोल-नगाड़ों से धुनें छेड़ते हुए अपने आप को नाचने से रोक नहीं पाए। जहां नरसिंह भगवान और जमलू देवता तीसरी जलेब यात्रा में
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खूब नाचे बजंतरी, ‘राजाधाना री सेरी’ शहनाई पर निकले भगवान नरसिंह

मनोज उनियाल की रिपोर्ट

कुल्लू। अंतरराष्ट्रीय दशहरा उत्सव की तीसरी जलेब में खास देवी-देवताओं के बंजतरी खूब नाचे। भगवान नरसिंह की जलेब जैसे-जैसे कालेज रोड होते हुए पहुंच रही थी, तो बजंतरी भी ढोल-नगाड़ों से धुनें छेड़ते हुए अपने आप को नाचने से रोक नहीं पाए। जहां नरसिंह भगवान और जमलू देवता तीसरी जलेब यात्रा में भी रक्षासूत्र बांध रहे थे, वहीं देवता जमलू पीज के बजंतरियों ने देवधुनों के साथ कुल्लवी नाटी की स्वर लहरियां ढोल-नगाड़ों से निकालीं, जिससे यात्रा का माहौल देखते ही बन रहा था। शहनाईवादक ने जलेब के दौरान माहौल को देवमय करने के साथ-साथ श्रद्धालुओं का मनोरंजन करने के लिए शहनाई को नाटी का स्वरूप दे दिया। उन्होंने ठेठ कुल्लवी गीत ‘राजाधाने री सेरी राजए’ गीत पेश किया, जिसकी खूब प्रशंसा हुई।

बता दें कि दशहरा उत्सव के दूसरे दिन रक्षासूत्र बांधने निकली पारंपरिक भगवान नरसिंह की पहली जलेब यात्रा में पीज के जमलू देवता ने ही भाग लिया था, वहीं दूसरी जलेब में रैला के देवता लक्ष्मी नारायण विराजमान हुए। तीसरी जलेब यात्रा में बुधवार को एक बार फिर देवता जमलू ने भाग लिया। दशहरा उत्सव की अंतिम जलेब यात्रा तक यह दो देवता ही जलेब की शोभा बढ़ाएंगे। हालांकि यह देवी-देवता प्राचीन समय से ही जलेब यात्रा में भाग लेते हैं, लेकिन इनके साथ अन्य देवी-देवता भी विराजमान होते थे, परंतु इस बार यही दो देवता बारी-बारी से भाग ले रहे हैं। ढालपुर चानणी से ठीक चार बजे के आसपास जलेब यात्रा रीति-रिवाज अनुसार शुरू होती है। इसके बाद अस्पताल, कालेज गेट और  कलाकेंद्र होते हुए पूरे ढालपुर मैदान के बाहर से परिक्रमा कर वापस चानणी के पास पहुंचती है। अगली जलेब यात्रा में फिर से देवता लक्ष्मी नारायण भाग लेंगे।