“करवा चौथ” के आगे नगण्य हो गया कोरोना का भय

मनोज उनियाल की रिपोर्ट शिमला। राजधानी शिमला के बाजारों में जिस कदर मंगलवार को लोगों की भीड़ उमड़ी उससे ऐसा लगा ही नहीं कि शिमला में कोविड महामारी भी फैली हुई है। बाजार में इतनी ज्यादा भीड़ थी कि लोगों को चलने तक की जगह नहीं थी। लोग जगह-जगह दुकानदारों और तह-बाजारियों द्वारा सजाई गई
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“करवा चौथ” के आगे नगण्य हो गया कोरोना का भय

मनोज उनियाल की रिपोर्ट

शिमला। राजधानी शिमला के बाजारों में जिस कदर मंगलवार को लोगों की भीड़ उमड़ी उससे ऐसा लगा ही नहीं कि शिमला में कोविड महामारी भी फैली हुई है। बाजार में इतनी ज्यादा भीड़ थी कि लोगों को चलने तक की जगह नहीं थी। लोग जगह-जगह दुकानदारों और तह-बाजारियों द्वारा सजाई गई दुकानों से तंग बाजार और ज्यादा तंग हो गए। ऐसे में लोग एक-दूसरे को धक्का और कोहनी मारते हुए आगे बढ़ रहे थे। शिमला में मंगलवार को भीड़ पूरी तरह से बेकाबू हो चुकी थी।

प्रशासन का भी यहां पर कोई इंतजाम नहीं रह गया था। त्यौहारी सीजन शुरू होते ही बाजारोंं में लोगों की भीड़ उमड़ना शुरू हो गई है। ऐसे में कोविड के मामलों में भी बढ़ोतरी होना शुरू हो गई है। शिमला में बाजारों के खुलने के बाद जैसे ही लोगों की भीड़ बढ़ना शुरू हुई है, वैसे ही कोविड के मामलों में भी इजाफा होना शुरू हो गया है। सोमवार की बात करें, तो जिला में कोविड के 85 मामले सामने आए थे।

शिमला शहर से भी काफी संक्रमित मिले थे। लगातार शिमला में संक्रमित मरीजों में इजाफा होता जा रहा है। बाजार में मंगलवार को सोशल डिस्टेंसिंग की भी पूरी तरह से धज्जियां उड़ाई गई। भीड़ ज्यादा होने से यहां पर किसी तरह का कोविड बचाव पालना पर उमल नहीं किया गया। मिठाइयों की दुकान में भी तरह लोगों की भीड़ उमड़ी। सबसे ज्यादा भीड़ महिलाओं की ही रही। मेहंदियां लगाने के लिए भी काफी संख्या में महिलाएं बाजार पहुंची। जगह-जगह मेहंदी लगाने वालो महिलाओं को मेहंदी लगाते हुए देखे जा सके। शिमला में इस तरह की भीड़ अकसर त्यौहारी सीजन में उमड़ती है। लेकिन इस बार भीड़ कम होने के आसार थे। दूसरी और इस बार भी पहले जैसे ही भीड़ बाजारों में देखने को मिली।

बीच बाजार से गुजरती एंबुलेंस भी कई जगह फंसी

बता दें कि मंगलवार की दोपहर करीब 12 बजे के आसपास एक एंबुलेंस बीच बाजार से होकर गुजर रही थी, लेकिन बाजार इतना ज्यादा तंग हो गया था कि एंबुलेंस भी कई जगह पर फंस गई। जबकि एंबुलेंस छोटा वाहन था। ऐसे में अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अगर कुछ आपातकाल में वाहन को बाजार के अंदर जाना हो, तो किसी चुनौती से कम नहीं है। लेकिन बावजूद इसके नगर निगम की और से कुछ नहीं किया जा रहा है। जोकि आने वाले समय में परेशानी बन सकता है।

दुकानदारों ने दुकान के बाहर सजाया सामान

शहर के तंग होने में दुकानदारों और तह-बाजारियों का भी बड़ा योगदान है। त्यौहारी सीजन आते ही दुकानदार अपना सामान दुकानों के बाहर सजा देते हैं, ताकि वे ज्यादा से ज्यादा ग्राहकों को लुभा सकें। ऐसे में लोगों का बाजार के बीच से चलना तक मुश्किल हो जाता है, वहीं अगर कोई सामान के साथ टकरा जाए, तो दुकानदार हाथापाई पर उतर आते हैं। ऐसे में नगर निगम भी कुछ नहीं कर पा रहा है। कुछ कसर तह-बाजारी पूरी कर देते हैं। लोअर बाजार में तह-बाजारी जगह-जगह बैठ कर बाजार को ओर तंग कर देते हैं। जिससे चलना ओर मुश्किल हो जाता है। एक-दूसरे को कोहनी मार कर लोगों को आगे जाना पड़ता है।