अटल के समय शुरू हुआ था टनल का कार्य, आज हुआ पूरा

मनोज उनियाल की रिपोर्ट अटल के सामने मैं और धूमल हिलाते थे मुंडी, अनुराग पर कहा हिमाचली छोकरो कुल्लू। सामरिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण अटल टनल रोहतांग के लोकापर्ण के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बड़ी बात कही। उन्होंने कहा कि यह टनल जहां विश्व में सामरिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण है। वहीं, यह मनुष्य निर्माण
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अटल के समय शुरू हुआ था टनल का कार्य, आज हुआ पूरा

मनोज उनियाल की रिपोर्ट

अटल के सामने मैं और धूमल हिलाते थे मुंडी, अनुराग पर कहा हिमाचली छोकरो

कुल्लू। सामरिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण अटल टनल रोहतांग के लोकापर्ण के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बड़ी बात कही। उन्होंने कहा कि यह टनल जहां विश्व में सामरिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण है। वहीं, यह मनुष्य निर्माण का कार्य करेगी। इसके लिए एक योजना बनानी पड़ेगा। इसके लिए प्रधानमंत्री ने रक्षा मंत्रालय, शिक्षा मंत्रालय और बीआरओ को अपने सुझाव नार्थ पोर्टल में दिए। उन्होंने कहा कि टनल की महत्ता और बढ़ाने का कार्य किया जाएगा।

इसके लिए एक डाक्यूमेंटेशन बनाया जा सकता है, जिसके लिए 15 सौ के करीब लोग इस टनल के बारे में अपनी भाषा में लिख सकते हैं। जिसमें टनल के शुरुआती दौर से लेकर अंतिम पड़ाव तक के कार्य के बारे में जानना जरूरी है। उन्होंने कहा कि यह ह्यूमन डाक्यूमेंटेशन होगा। इसका कैसे इंजीनियरिंग चेलेंज आया है।

यह देश का भविष्य के लिए अति महत्त्वपूर्ण है। उन्होंने सुझाव में कहा है कि इसकी जिम्मेदारी किसी को दें और इनमें करीब 15 सौ लोग जोड़े जाएं। वहीं शिक्षा मंत्रालय को दिए सुझाव में यह कहा है कि जितनी भी देश में यूनिवर्सिटी है, उनके बच्चों के इस काम पर लगाया जा सकता है। एक-एक यूनिवर्सिटी से आठ-दस बच्चे यहां आ सकते हैं और इसका बारीकी यहां के बीआरओ के अधिकारी, इंजीनियर, मजदूर से जानकारी हासिल कर सकते हैं।

अटल के समय शुरू हुआ था टनल का कार्य, आज हुआ पूरा

विश्व की बड़ी टनल का देश के बच्चों को नॉलेज होना चाहिए। दुनिया के अंदर इस ताकत की पहचान होनी चाहिए। समिति संसाधानों के बाद भी किस तरह से काम किया गया, इसका ज्ञान दुनिया को होना चाहिए। यह अटल एजुकेशन का हिसा बने। मनुष्य निर्माण का कार्य यह टनल आसानी से करेगी। टनल का काम अपने आप में इंजीनियरिंग की दृष्टि से यूनिक है।

आज दशकों पुरानी इतिहास खत्म

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अटल टनल रोहतांग के साउथ पोर्टल में कहा कि आज मेरे हिमाचल भाई-बहनों का दशकों पुराना सपना पूरा हो गया है। यह दिन इतिहास भरा रहा है। अटल टनल बनने से पूर्व प्रधानमंत्री एवं स्व.अटल बिहारी वाजपेयी जी का सपना ही पूरा नहीं, बल्कि हिमाचल के कारोड़ों लोगों का दशकों पुराना इंतजार खत्म हुआ है। पीएम ने कहा कि बड़ा सौभाग्य है कि आज अटल टनल के लोकापर्ण का अवसर मिला है। पीएम ने यह भी जिक्र किया कि हिमाचल में संगठन का प्रभारी के नाते काम देखा है। यहां के पहाड़ों और वादियों में उत्तम समय बिताया है।

अटल के समय शुरू हुआ था टनल का कार्य, आज हुआ पूरा

अटल के सामने मैं और धूमल हिलाते थे मुंडी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि जब वे हिमाचल के प्रभारी थे तो वे पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी के पास मनाली जाते थे। उस दौरान मनाली में उनके साथ बैठते थे। गपशप कारते थे। जब मैं और धूमल चाय पीते कुछ बात करते थे और यहां के बड़े विकास को लेकर चर्चा करते थे तो स्व. अटल गहराई से उन पढ़ रहे होते थे। हम मुंडी हिला देते थे। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज स्व. अटल जी का सपना संकल्प बन गया। हम उसे सिद्धि के रूप में देख हैं। जीवन में कितना बड़ा संतोष हो सकता है, कल्पना कर सकते हैं।

पीर पंजाल को भेद बनाई टनल

प्रधानमंत्री ने कहा कि बीआरओ ने पीर पंजाल को भेद कर कठिन संकल्प के बीच आज टनल का कार्य पूरा किया है। इसके लिए बीआरओ के अधिकारी, इंजीनियर्स, मजदूर बधाई के पात्र हैं। इस महायज्ञ में बीआरओ की टीम ने अपना खूब पसीना बहाया है। बर्फबारी के साथ-साथ अन्य भौगोलिक एवं कठिन परिस्थितियों में जान जोखिम डालकर इंजीनियस और मजदूरों ने कहा किया। इसके लिए सभी भाइयों को मैं आदरपूर्वक नमन करता हूं।

यहां मिलेगा फायदा

प्रधानमंत्री ने कहा कि अटल टनल बनने से जनजातीय लाहुल-स्पीति के साथ-साथ हिमाचल ही नहीं बल्कि देश के नए केंद्रीय शासित प्रदेश लेह-लद्दाख के लिए भी यह लाइफ लाइन बन गई है। हिमाचल का बड़ा क्षेत्र और लेह-लद्दाख जुड़े रहेंगे। मनाली और केलांग के बीच की दूरी तीन-चार घंटे कम हो गई है। पहाड़ के भाई बहन समझ सकते हैं कि पहाड़ से इतनी दूरी कम होने का क्या मतलब होता है। लेह के लोगों को दिल्ली राजधानी तक आसानी से पहुंचने में बड़ा लाभ मिलेगा। सफर का जोखिम कम हो जाएगा। यह टलल देवधरा हिमाचल के साथ परंपरा को सशक्त करने वाली है। भारत में नई रोशनी दिखा रही है। टनल बनने पर हिमाचल और लेह-लद्दाख के सभी लोगों को बहुत-बहुत बधाई है। अटल टनल बार्डर को नई ताकत देनी वाली है। विश्व स्तरीय बार्डर को जोड़े रखने का प्रमाण है। हिमालय का हिस्सा है। देश की सुरक्षा और समृद्धि के लिए बहुत बड़ा संसाधन है।

अटल के समय शुरू हुई था टनल का कार्य

2002 में स्व. अटल जी के समय इसकी पहल शुरू हुईं थी और पुल का शिलान्यास किया। सरकार के जाने के बाद काम पिछली सरकार ने भूला दिया था। हालात यह बने थे कि वर्ष 2013-14 टनल के लिए डेढ़ किलोमीटर ही कम काम हो पाया था। जिस रफ्तार से अटल टनल का काम उस दौरान हो रहा था तो 2040 में जाकर काम पूरा होना था। प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार बनते ही इस कार्य को प्रगति दी गई। देश के विकास को प्रवल इच्छा के साथ रफ्तार बढ़ाई गई। 2014 के बाद टनल के कार्य अभूतपूर्वक में तेजी लाई। बीआरओ की अड़चन को दूर किया।

पिछली सरकार के समय जहां साल में 300 मीटर सुरंग बन रही थी, 2014 के बाद कार्य की प्रगति 1400 मीटर प्रति वर्ष हो गई। सिर्फ छह-सात साल में 26 साल का काम पूरा कर लिया। उन्होंने कहा कि 2005 में आंकलन किया गया था साढ़े नौ सौ में टनल तैयार हो जाएगी। लेकिन लगातार होती रही देरी के कारण आज यह तीन गुणा से ज्यादा 32 सौ करोड़ खर्च करने के बाद पूरी हो गई। कल्पना करें कि बीस वर्ष और लगते तो कितना खर्च होता। विशेष रूप से बार्डर इंफ्रास्ट्रेचर के विकास के लिए पूरी ताकत लगा दी है। हिमाचल, जम्मू-कश्मीर, लेह-लदाख, सिक्कम, अरुणाचल प्रदेश में प्रोजेक्ट तेजी से काम चल रहा है।

सडक़, पुल, सुरंग का काम बड़े स्तर पर देश में इन क्षेत्रों में किया जा रहा है। पहले कभी ऐसा काम नहीं हुआ है। इसका लाभ आम जनता के साथ सेना के जवानों को हुआ है। यह भाजपा सरकार की प्राथमिकता है और रहेगी। वन रेंक वन पेंशन को लेकर पिछली सरकार ने कुछ नहीं किया था, लेकिन उनकी सरकार ने सबसे पहले यह कार्य किया है। आज वन रेंक, वन पेंशन का लाभ मिला है। हिमाचल के करीब एक लाख फौजी साथियों को इसका लाभ मिल रहा है। जो फैसले किए हैं, उन्हें लागू कर दिखाया है। देश हित, देश रक्षा से बड़ा कुछ नहीं है। देश की वायु सेना को आधुनिक फाइटर, आधुनिक राइफलें, कड़ाके की ठंड में काम आने वाले उपकरण सहित अन्य सभी सुविधाएं दी गई।

हिमाचल का मुझ पर अधिकार है

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नोर्थ पोर्टल में कहा कि हिमाचल को मेरा कितना अधिकार है, यह नहीं कह सकता हूं। लेकिन हिमाचल का मुझ पर बहुत अधिकार है। कुछ सुझाव देना चाहता हूं भारत रक्षा मंत्रालय, शिक्षा मंत्रालय और बीआरओ के लिए है।

अनुराग नाम लेते हुए हिमाचली छोंकरों शब्द निकला

जब मंच पर आते ही सबसे पहले संबोधन में प्रधानमंत्री ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह उसके बाद मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर और उसके बाद केंद्रीय राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर का नाम लिया। नाम लेते हुए हिमाचल में छोकरों शब्द प्रधानमंत्री के मुख्य से निकला। वहीं, हिमाच सराकर के मंत्री, चीफ ऑफ डिफेंस, सभी सेना के अधिकारी, बीआरओ, स्टाफ, रक्षा मंत्रालय का नाम लिया गया।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने किया नरेंद्र मोदी का अभिनंदन

साउथ पोर्टल में रक्षामंत्री राजनाथ सिंह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अभिनंदन किया। उन्होंने इस दौरान यह कहा कि अभिनंद इसलिए भी करना चाहता हूं। क्योंकि पीएम ने यहां पर बड़ी जिम्मेवारी पहले निभाई है, स्व. अटल जी के समय समय से रोहतांग टनल की चिंता की है। समय से टनल पूरी हो गई है। बार्डर रोड आगेनाइजेशन ने बेहतरीन काम किया। जिंदगी और मौत के बी जंग लड़ कर काम किया है। बीआरओ को रक्षा मंत्री ने बधाई दी। सामरिक दृष्टि से इस टनल का महत्व है। सीमा पर तैनात राशन, वैन सहित अन्य सामग्री के साथ-साथ अन्य उपकरण भेजने के लिए यह टनल आसान हुअई। दो देशों की सीमा पर यह टनल बनी है। देश की जनता को समर्पित है।

सेना के जवानों और लोगों के लिए यह टनल समर्पित है। अब यहां का पर्यटन बढ़ेगा। रोजगार बढ़ेगा। कुछ महीनें ऑल वेदर कनेक्टिविटी नहीं होती थी। अब अपना कारोबार आसानी से कर सकते हैं। यहां का क्षेत्र शेष भारत से कटा रहता था। हिमाचल ही नहीं ले यह टनल सामाकि आर्थियक विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण टनल है। रक्षामंत्री ने कहा कि जब पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी ने इस टनल को लेकर संकल्प और घोषणा की थी, तो उस दौरान वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यहां के प्रभारी थे। देशवासियों को टनल समर्पित करने के लिए आज प्रधानमंत्री यहां पहुंचे हैं। यह बड़ी सौभाग्य की बात है।