अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा का फीका आगाज

भगवान रघुनाथ का रथ खींचने को मुट्ठी भर लोग ही रहे मौजूद मनोज उनियाल की रिपोर्ट कुल्लू-अंतरराष्ट्रीय उत्सव कुल्लू दशहरा भगवान रघुनाथ की रथयात्रा के साथ रविवार को शुरू हो गया। इस सात दिवसीय उत्सव का विधिवत शुभारंभ भगवान रघुनाथ जी की शोभायात्रा के साथ करीब 10 मिनट में ही पूरा हो गया, पर इस
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अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा का फीका आगाज

भगवान रघुनाथ का रथ खींचने को मुट्ठी भर लोग ही रहे मौजूद

मनोज उनियाल की रिपोर्ट

कुल्लू-अंतरराष्ट्रीय उत्सव कुल्लू दशहरा भगवान रघुनाथ की रथयात्रा के साथ रविवार को शुरू हो गया। इस सात दिवसीय उत्सव का विधिवत शुभारंभ भगवान रघुनाथ जी की शोभायात्रा के साथ करीब 10 मिनट में ही पूरा हो गया, पर इस बार न तो नजारा अद्भुत था और न ही अलौकिक। मात्र औपचारिकता के लिए मनाए जा रहे इस उत्सव की शुरुआत पर मुट्ठी भर लोगों ने भगवान रघुनाथ का रथ खींचकर पुण्य कमाया।

वहीं, सड़कों पर नाममात्र लोगों का भीड़ ही रथयात्रा देखने के लिए उमड़ी, क्योंकि इस बार कोरोना महामारी के चलते लोगों को रथ मैदान के अंदर आने की अनुमति नहीं थी। रथ मैदान में केवल 200 लोगों को ही आने की अनुमति रखी गई थी। ऐसे में इस बार जिन देवी-देवताओं ने दशहरे में शिरकत की, उनके साथ भी रथ मैदान में कम ही संख्या में हरियान अंदर आए। वहीं, भगवान रघुनाथ जी की शोभायात्रा के साथ ही भगवान रघुनाथ के जयकारों व जय श्रीराम के उद्घोष से समूची घाटी गूंज उठी। इससे पहले भगवान रघुनाथ जी सुल्तानपुर से कड़ी सुरक्षा के बीच चलकर ढालपुर मैदान पहुंचे। रथ मैदान भगवान रघुनाथ के पहुंचने से पहले देवी-देवताओं का भी आगमन शुरू हुआ। जहां पर आदि ब्रह्म देव सबसे पहले रथ मैदान में वाद्य यंत्रों की थाप के साथ पहुंचे। उसके बाद नाग धूमल भी अपने हरियानों के साथ रथ मैदान पहुंचे और उसके बाद स्थानीय देवता वीरनाथ मैदान में आए। कुछ देरी बाद मां हिडिंबा भी अपने हरियानों के साथ रथ मैदान में आ गईं। इस दौरान देव खेल देखने को मिला। जहां पर देवी-देवता नाराज भी दिखे। इसके बाद देव परंपरा को निभाया गया।

राज परिवार के सदस्य सहित भगवान रघुनाथजी के छड़ीबदार महेश्वर सिंह ने रथ की परिक्रमा की और उसके बाद मां भेखली का इशारा होते ही भगवान रघुनाथ की रथयात्रा शुरू हुई। भक्तों ने रथ खींचकर उनके अस्थायी शिविर तक पहुंचाया, जहां पर भगवान राम अब सात दिनों तक विराजमान रहेंगे  और अंतिम दिन लंका दहन के बाद वह फिर से सालभर के लिए अपने स्थायी शिविर में लौट जाएंगे। सात दिनों तक जिलाभर के भक्त उनके अस्थायी शिविर में आकर उनका आशीर्वाद ले सकते हैं। इससे पहले सुबह के समय दशहरा उत्सव में शरीक होने कुल्लू पहुंचे आठ देवी-देवताओं ने रघुनाथ के दरबार में हाजिरी भरी। लोगों ने जगह-जगह देवी-देवताओं का स्वागत कर आशीर्वाद लिया। माता हिडिंबा, देवता जमलू और लक्ष्मी नारायण, नाग धूमल, माता त्रिपुरा सुंरदरी ने कहा कि किसी प्रकार से डरने की बात नहीं। दशहरा में कोई अनहोनी नहीं होने देंगे।

इस बार उत्सव में मात्र आठ देवता

इस बार इस महाकुंभ में मात्र आठ देवताओं को ही शामिल होने की अनुमति मिली, अन्यथा क्षेत्र के हर देवी-देवता शोभा यात्रा की ‘शोभा’ बढ़ाते थे, जिनकी संख्या करीब 250 तक पहुंच जाती थी।

बाजार बंद, लोग घरों के अंदर

शायद इस महोत्सव के इतिहास का यह पहला ही मौका होगा, जब दशहरा की यात्रा से पहले ही बाजार बंद करा दिए गए। साथ ही आम आदमी को घरों के अंदर रहने को मजबूर होना पड़ा। अब तक आम से खास तक हर आदमी उत्सव में शरीक होकर शोभा यात्रा का हिस्सा बनता था।