SC ने वेदांता के प्लांट को चलाने की मंजूरी दी, हाई कोर्ट के काम में दखल से इनकार

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SC ने वेदांता के प्लांट को चलाने की मंजूरी दी, हाई कोर्ट के काम में दखल से इनकार

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को तमिलनाडु के तूतीकोरिन में वेदांता के स्टरलाइट संयंत्र को ऑक्सीजन का उत्पादन करने की अनुमति दे दी। देश में कोरोना महामारी की वजह से ऑक्सीजन की भारी किल्लत के बीच शीर्ष अदालत ने इसे एक राष्ट्रीय जरूरत बताते हुए यह अनुमति प्रदान की है। अदालत ने कहा कि केवल ऑक्सीजन संयंत्र को संचालित करने की अनुमति दी जाएगी और ऑक्सीजन के लिए राष्ट्रीय आवश्यकता को देखते हुए यह आदेश पारित किया गया है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि वेदांता की ओर से तूतीकोरिन में स्टरलाइट कॉपर इकाई को केवल ऑक्सीजन का उत्पादन करने की अनुमति है और यहां पर ऑक्सीजन बनाने के अलावा अन्य कोई गतिविधि नहीं होगी।

आदेश पारित करते हुए पीठ ने तमिलनाडु सरकार से तूतीकोरिन में वेदांता की कॉपर इकाई में गतिविधियों की निगरानी के लिए एक पैनल बनाने को भी कहा। बता दें कि वेदांता की यह कॉपर इकाई मई 2018 से ही बंद पड़ी है।

अदालत ने साफ किया कि वेदांता समूह हमारे इस आदेश की आड़ में परिसर में घुसकर कॉपर प्लांट में काम शुरू नहीं करेगा।

सुप्रीम कोर्ट ने आदेश देते वक्त यह भी कहा कि वेदांता द्वारा ऑक्सीजन उत्पादन को लेकर कोई राजनीतिक कलह नहीं होना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह एक राष्ट्रीय संकट है।

शीर्ष अदालत वेदांता की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें कहा इसने तूतीकोरिन में अपनी स्टरलाइट कॉपर यूनिट खोलने की मांग की थी और साथ ही कहा था कि वह इसमें ऑक्सीजन का उत्पादन करेगी और इसे मरीजों का इलाज करने के लिए मुफ्त देगी।

वेदांता ने तीन महीने के लिए संयंत्र को सौंपने की मांग करते हुए कहा कि इकाई शुरू करने के लिए दो महीने की आवश्यकता है और कंपनी को यह पता लगाने के लिए चार सप्ताह तक इसे चलाने की अनुमति दी जानी चाहिए कि यह प्रदूषणकारी है या नहीं।

अगस्त 2020 में, वेदांता ने मद्रास हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था, जिसने तूतीकोरिन संयंत्र को फिर से खोलने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। मद्रास हाईकोर्ट ने तमिलनाडु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (टीएनपीसीबी) के मई 2018 में इकाई को बंद करने के आदेश को बरकरार रखा था।

इससे पहले वेदांता ने फरवरी 2019 में संबंधित हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था और स्टरलाइट प्लांट को फिर से खोलने की अनुमति मांगी थी, जो कि 23 मई, 2018 के आदेश के बाद से बंद है।

वहीं शीर्ष अदालत के फैसले से पहले सोमवार को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के. पलानीस्वामी की अध्यक्षता में एक सर्वदलीय बैठक ने सर्वसम्मति से चार महीने तक अस्थायी रूप से तूतीकोरिन में वेदांता के स्टरलाइट कॉपर यूनिट में ऑक्सीजन संयंत्र के संचालन की अनुमति देने का निर्णय लिया था।

बैठक ने फैसला किया गया था कि ऑक्सीजन प्लांट और अन्य संबंधित इकाइयों को संचालित करने के लिए बिजली की आपूर्ति राज्य सरकार द्वारा की जाएगी और वेदांता अपनी बिजली सुविधाओं का उपयोग नहीं कर सकता है।