चौकसी है या चौधराहट

अनिल अनूप जाहिर है यह सियासत का वक्त नहीं है, फिर भी लोकतांत्रिक माहौल में सरकारी दायित्व की पड़ताल होगी। धीरे-धीरे लॉकडाउन से बाहर निकल कर राजनीति जिस मचान पर जा बैठी उसका संदेश चौकसी है या चौधराहट। हिमाचल में नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री के हालिया बयानों ने हिमाचल सरकार के साथ संतुलन तोड़ा है, तो
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चौकसी है या चौधराहट

अनिल अनूप

जाहिर है यह सियासत का वक्त नहीं है, फिर भी लोकतांत्रिक माहौल में सरकारी दायित्व की पड़ताल होगी। धीरे-धीरे लॉकडाउन से बाहर निकल कर राजनीति जिस मचान पर जा बैठी उसका संदेश चौकसी है या चौधराहट। हिमाचल में नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री के हालिया बयानों ने हिमाचल सरकार के साथ संतुलन तोड़ा है, तो विवाद की खटास उभर आई। प्रधानमंत्री ने मुख्यमंत्रियों के बीच कोरोना कहर की जो पड़ताल की है, उसमें हिमाचल का पक्ष श्लाघनीय रहा। एक्टिव केस फाइंडिंग की दिशा में हिमाचल की अग्रणी भूमिका रही और इस हिसाब से सरकार की सक्रियता  को राष्ट्रीय मान्यता मिली। बावजूद इसके कोरोना के खिलाफ अख्तियार रणनीति को अंतिम पायदान पर नहीं देखा जा सकता है और अभी हर लम्हे पर सुरक्षा की दीवारें चाहिएं। ऐसे में देखना यह होगा कि विपक्ष के रूप में कांग्रेस कह क्या रही या कहीं इससे अधिक अगर नेता प्रतिपक्ष कह रहे हैं, तो क्या सही माना जाए और क्या छोड़ा जाए। संकट के इस दौर में विपक्ष की भूमिका भी काफी हद तक निर्धारित है और इस लिहाज से आरंभिक समर्थन देखा गया, लेकिन अब सरकार के मुताबिक कुछ ज्यादती हो रही है। बाकायदा मुकेश अग्निहोत्री पर सरकार व भाजपा मुखर हुई हैं, तो इसके मायने एकतरफा नहीं हो सकते। सरकार के पास कहने को बहुत कुछ होगा, लेकिन करने के लिए और भी ज्यादा रहेगा। अगर कांग्रेस की राय में प्रदेश को कुछ बेहतर करने में सहयोग मिलता है, तो इसे राजनीति की सही दिशा माना जा सकता है, लेकिन सरकार के हर कदम को मापना इस वक्त की जरूरत नहीं। सरकार विपक्ष को पूरी तरह नकार कर सफल घोषित नहीं हो सकती और न ही विपक्ष अपनी आलोचनाओं का जखीरा तैयार करके कोरोना जैसी परिस्थिति में समाज और राष्ट्र को सही संदेश देगा। बेशक विपक्ष को समय की धार पर खड़े रहना है और यह मुआयना भी करना है कि कहीं गलत दिशा में सरकार भटक न जाए। विडंबना यह है कि सियासत अपने लिए ऐसी परिधि हमेशा चुनती है, जहां सत्ता पूरा चक्कर काटना चाहती है तो विपक्ष इसे रोकने की आजमाइश में रहता है। यहां भी विपक्ष के लिए कुछ मुद्दे रहेंगे और सत्ता के लिए यह कार्यक्षेत्र की तरह साबित होने की वजह है। हिमाचल में सुशासन की तहजीब में जागरूक नागरिकों की अपेक्षाओं का दबाव सदा रहा है, लेकिन इसके साथ-साथ विपक्ष की भूमिका और मीडिया का प्रभाव स्पष्ट है। इसीलिए हिमाचल की राजनीति को महज वोट बैंक के गणित में पढ़ना इतना भी आसान नहीं कि पिछले काफी सालों से अदला-बदली के दौर में कार्य समीक्षा हो जाए। कमोबेश यहां सरकारों के प्रदर्शन में प्रशासनिक दक्षता के मजमून हमेशा इसकी श्रेष्ठता में परखे गए हैं और इसी हिसाब से हर मुख्यमंत्री की समयावधि का तुलनात्मक अध्ययन भी हुआ है। जाहिर है कोरोना के खिलाफ अपरिचित, अवांछित, असामान्य और सदी की अत्यंत भीषण परिस्थितियां पैदा हुई हैं, तो सरकार का अवलोकन भी इसी हिसाब से होगा। अब तक के रिपोर्ट कार्ड में दर्ज उपलब्धियों में हिमाचल ने अगर इस संकट में खुद को साबित किया है तो यह अपने हस्ताक्षर में जयराम ठाकुर का विशेष उल्लेख करेंगे। आरंभिक चुनौतियों और परिस्थितियों के बाहर आज हिमाचल न केवल कोरोना के खिलाफ खुद को बुलंद कर पाया, बल्कि तीव्रता से रिकवरी करता हुआ स्थिरता से हर चरण में काबिलीयत दर्ज कर रहा है। यह एक दृश्य है, लेकिन इसके साथ जुड़े परिदृश्य से विपक्ष कभी खारिज नहीं होगा। वह अपनी तौर पर सामाजिक, आर्थिक व सियासी विषयों को छूता रहेगा। यह दीगर है कि नुक्ताचीनी और बहस में महीन सा अंतर है और जब इसमें सुराख हो जाएं तो सियासत की परिभाषा और इसके अर्थ बदल जाते हैं। मुख्य कारणों से प्रदेश की हर पहल की पृष्ठभूमि तैयार होती है और इस बार कोरोना के खिलाफ लिए गए हर फैसले के साथ अनुभव से परिणाम तक एक व्यापक फासला है। कोई नहीं कह सकता कि आज के कदम ही अंतिम होंगे, क्योंकि अंतिम चुनौती तो किसी न किसी वैज्ञानिक सफलता से ही दूर होगी। ऐसे में हर प्रयास के फलक पर छींटाकशी नहीं हो सकती है और न ही सरकार का हर कदम मुकम्मल होगा। यह राजनीति के लिए भी सीखने का दौर है। हद से ज्यादा दरारें ढूंढ कर या दीवारें खड़ीं करके न विपक्ष सफल होगा और न ही सरकार को अपने दृढ़ प्रतिज्ञ संकल्प को सियासी मुद्दों से प्रतिस्पर्धा करनी होगी। आम जनता के कुछ मसले हमेशा विपक्ष की भूमिका में सामने आते रहेंगे, अतः इन्हें स्वीकार करना होगा। लोकतंत्र के सामर्थ्य में भी कोरोना के खिलाफ जंग जारी है, इसलिए विपक्ष का स्थान हमेशा रहेगा।