लता मंगेशकर ने पंडित राजन मिश्र के निधन पर जताया दुख, कोरोना की वजह से टूटी राजन-साजन मिश्र की जोड़ी

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लता मंगेशकर ने पंडित राजन मिश्र के निधन पर जताया दुख, कोरोना की वजह से टूटी राजन-साजन मिश्र की जोड़ी

नई दिल्ली। शास्त्रीय गायन की दुनिया में राजन-साजन मिश्र की जोड़ी को बेरहम कोरोना वायरस संक्रमण ने रविवार को तोड़ दिया। कोरोना संक्रमण की चपेट में आए शास्त्रीय गायक राजन मिश्र ने रविवार शाम को सेंट स्टीफेंस अस्पताल में में इलाज के दौरान दुनिया को अलविदा कह दिया। जागरण संवाददाता से मोबाइल फोन पर रूंधे गले से पंडित साजन मिश्र ने कहा- 'भइया नहीं रहे'। इस खबर से कला-संगीत की दुनिया से जुड़े लोगों को बड़ा झटका लगा है, क्योंकि शास्त्रीय संगीत की इस जोड़ी ने दशकों तक अपने गायन से करोड़ों दिलों को सुकून दिया। राजन  मिश्र पहलवानी के भी शौकीन रहे थे। बचपन में अपने छोटे भाई साजन मिश्र के साथ अखाड़े में मशक्कत कर खुद काे फिट रखते थे और क्रिकेट खेलने का भी बहुत शौक था। कॉलेज लेवल तक खेला भी।

बता दें कि कोरोना पीड़ित पद्म भूषण से सम्मानित पंडित राजन मिश्र को गंभीर हालत में रविवार को दिल्ली के सेंट स्टीफेंस अस्पताल में भर्ती कराया गया था, यहां पर लगातार उनकी हालत गंभीर बनी हुई थी। इसके बाद देर शाम उनके निधन की खबर आई।

 जानकारी मिली थी कि राजन मिश्र को कोरोना वायरस संक्रमण के हृदय की भी कुछ समस्या आई थी। इसके बाद परिवार ने उन्हें सेंट स्टीफंस अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इसके बाद ट्विटर पर कुछ लोगों ने उनके लिए एक बेड और ऑक्सीजन की मदद भी मांगी थी। इंटरनेट मीडिया के जरिये जानकारी सामने आई थी कि आइएएस अधिकारी संजीव गुप्ता के प्रयासों से पंडित राजन मिश्र को दिल्ली के सेंट स्टीफंस अस्पताल में दाखिला मिल गया था।

बता दें कि 1985 बैच के आईएएस अधिकारी रहे संजीव गुप्ता ने ट्वीट किया था- 'आखिरकार, मेरी साजन मिश्र से बात हो गई। उन्होंने मुझसे कहा कि राजन मिश्र आइसीयू से बाहर आ चुके हैं, जो कि डॉक्टर जॉन के मुताबिक अच्छी बात है और वे अब शायद BiPAP facility में हैं। डॉ. जॉन वहां जाकर उनकी जांच करेंगे और उनके स्वास्थ्य के बारे में मुझे जानकारी देंगे।

बनारस घराने से ताल्लुक रखने वाले संगीतकार और पद्मभूषण से सम्मानित पंडित राजन और साजन मिश्र का मानना है कि जैसे मनुष्य का शरीर प्रकृति के पांच तत्वों से मिलकर बना है, वैसे ही संगीत के सात सुर ‘सारेगामापाधानी’ पशु-पक्षियों की आवाज से लिए गए हैं।

कुछ सालों पहले दोनों ने कहा था कि आपदा के लिए प्रकृति नहीं हम जिम्मेदार हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि हर किसी को अपनी मानसिकता बदलनी होगी।