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कुशीनगर गन्ने का आवंटन बढ़ने से चलेगी पिपराइच चीनी मिल,चार केंद्र और आवंटित।

गोरखपुर, शासन स्तर पर की गई व्यवस्था में कुशीनगर की गन्ने से गोरखपुर की पिपराइच चीनी मिल इस बार भी चलेगी। यहां के क्रय केंद्रों के साथ गन्ने का आवंटन भी बढ़ा दिया गया है।पिछली साल जिले के 17 क्रय केंद्रों से गन्ने की आपूर्ति लेने वाली मिल को और चार केंद्र आवंटित हुए हैं। अब 21 केंद्रों से गन्ना जाएगा। पिछले साल 24.84 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई की थी। इस बार 25.70 लाख क्विंटल गन्ने का आवंटन मिला है। जबकि महराजगंज के गड़ौरा को पिछले साल पांच क्रय केंद्रों से आवंटित 3.24 लाख क्विंटल गन्ना का आवटंन काट दिया गया है। विभाग ने गाेरखपुर की पिपराइच समेत छह मिलों को 67817 हेक्टेयर अर्थात 486.68 लाख क्विंटल गन्ना आवंटित किया है, जिसमें कुशीनगर की पांच चीनी मिलें भी शामिल है।

दो वित्तीय वर्षों में आवंटन का तुलनात्मक आंकड़ा

चीनी मिल क्रय केंद्र (पिछले वर्ष) गन्ना (लाख क्विंटल) क्रय केंद्र (अब) गन्ना (लाख क्विंटल)

खड्डा- चार – 18.31 – सात – 45.39

रामकोला पी- 35 – 63.62 – 34 – 139.20

कप्तानगंज- 21 – 27.75 – 20 – 37.54

सेवरही- 34 – 43.45 – 34 – 110.50

ढाढ़ा- 43 – 62.26 – 43 व (देवरिया का 11)-128.40

पिपराइच (गोरखपुर)- 17 – 24.84 – 21 – 25.65

गड़ौरा (महराजगंज)- पांच – 3.24 – शून्य – शून्य

कम होते गए क्रय केंद्र

पिछले साल की तरह इस वर्ष कुल 159 क्रय केंद्र हैं। जबकि वर्ष 2019-2020 में कुल 184 क्रय केंद्र बनाए गए थे, जिसमें खड्डा सात, रामकोला 38, कप्तानगंज 28, सेवरही 37, ढाढ़ा 60, पिपराइच (गोरखपुर) 14 केंद्र शामिल है ।

यहां के किसानों को हाेगी परेशानी

पहले से बंद चीनी मिलों में पडरौना, कठकुइयां, लक्ष्मीगंज, छितौनी व रामकोला परिक्षेत्र के गन्ने का आवंटन पिछली बार नजदीकी क्रय केंद्रों से जोड़ा गया था। इस बार भी विभाग ने अलग-अलग केंद्रों से जोड़ा है। इससे किसानों का भाड़ा खर्च बढ़ेगा।

मिलों की पेराई क्षमता

-खड्डा-1600 टीसीडी (टन क्रश पर डे)

-रामकोला पी-6500 टीसीडी

-कप्तानगंज-6000 टीसीडी

-सेवरही-5000 टीसीडी

-ढाढ़ा-8000 टीसीडी

-पिपराइच-5000 टीसीडी

कुछ केंद्रों को विलापित कर दूसरे से जोडा गया

जिला गन्‍ना अधिकारी वेद प्रकाश सिंह ने बताया कि गन्ने के आवंटन के साथ क्रय केंद्रों का निर्धारण हो गया है। कुछ क्रय केंद्र विलोपित करते हुए दूसरे से जोड़ दिया गया है। मिल प्रबंधन को निर्देशित किया गया है कि वह गन्ना पेराई के 14 दिन के भीतर किसानों को भुगतान करें। इसमें लापरवाही मिलने पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई होगी।

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