सस्ते एवं प्रभावी गर्भनिरोधक का 30 साल का जश्न

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विश्व गर्भनिरोधक दिवस

शशांक तिवारी की रिपोर्ट

आज दुनिया मानव गतिविधियों के कारण जलवायु परिवर्तन के इर्द-गिर्द घूम रही है और एक जनसंख्या विस्फोट जैसी स्थिति को बुलावा दे चुकी है। इसलिए, समाज मेन जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से विश्व गर्भनिरोधक दिवस हर साल 26 सितंबर को मनाया जाता है। यह वार्षिक विश्वव्यापी अभियान 2007 में लॉन्च किया गया, इसका मिशन गर्भनिरोधक के बारे में जागरूकता लाना और युवाओं को उनके प्रजनन स्वास्थ्य संबंधी एवं गर्भनिरोधकों की जानकारी देकर उन्हें परिवार नियोजन हेतु सक्षम बनाना है। आमतौर पर, प्रजनन आयु की महिलाओं में उच्च रक्तचाप और मधुमेह जैसी बीमारियाँ देखी गईं हैं इस प्रकार की महिलाओं में गर्भावस्था अक्सर उच्च जोखिम भरी हो सकती है। इन महिलाओं को दवाओं की भी आवश्यकता हो सकती है जो गर्भावस्था के दौरान उपयोग नहीं की जानी चाहिए। इसलिए, सावधानीपूर्वक नियोजित गर्भावस्था महिलाओं के स्वास्थ्य और बच्चे की भलाई के लिए महत्वपूर्ण है, सामूहिक रूप से किसी व्यक्ति और देश की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में भी योगदान देती है।

सेंट्रोक्रोमान: स्टेरायड-रहित मुख से लिए जाने वाला (ओरल) गर्भनिरोधक 

भारत की स्वतंत्रता के बाद नए भारत में परिवार नियोजन को बढ़ावा देने के लिए, सीएसआईआर-सेंट्रल ड्रग रिसर्च इंस्टीट्यूट, लखनऊ, ने स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के कार्यक्रम के तहत 1960 में मुख से लिए जाने वाले (ओरल) गर्भनिरोधकों पर काम करना शुरू कर दिया था। हालांकि 1960 में, यूएसए एफडीए ने स्टेरायड आधारित मौखिक गर्भनिरोधक एजेंटों को मंजूरी दे दी थी, लेकिन स्टेरायडल गर्भनिरोधक के गंभीर दुष्प्रभाव भी समेन आ रहे थे; इसलिए, सीडीआरआई ने ऐसे गैर-स्टेरायडल गर्भ निरोधकों की खोज पर ध्यान केन्द्रित किया  जिनमें कोई दुष्प्रभाव (साइड इफ़ेक्ट्स) न हो।

क्लिनिकल परीक्षण के आधार पर, सेंट्रोक्रोमान को हाइपोथैलेमस एंडोक्राइन एक्सिस एवं ओव्यूलेशन में बिना किसी रुकावट के ब्लास्टोसिस्ट के एंटी-इम्प्लांटेशन प्रभावों के साथ मौखिक गर्भनिरोधक के रूप में मंजूरी दे दी गई थी। सबसे दिलचस्प परिणाम ये था की ये मतली, उल्टी और वजन बढ़ने जैसे सामान्य स्टेरॉयड दवाओं के साइड-इफेक्ट भी से रहित था। वांछित परिवार नियोजन को प्राप्त करने के बाद, सेंट्रोक्रोमान को लेना बंद किया जा सकता है जिसके बाद प्रजनन क्षमता पुनः पहले की तरह बहाल हो जाती है। औषधि महानियंत्रक, भारत (ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया DCGI) ने 1990 में विपणन के लिए मौखिक गर्भनिरोधक दवा के रूप में स्वीकृति प्रदान की और स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने एचएलएल  केयर त्रिवेंद्रम और टोरेंट फार्मा लिमिटेड, अहमदाबाद को लाइसेंस दिया गया । बाद में 1995 में सामाजिक विपणन के लिए राष्ट्रीय परिवार कल्याण कार्यक्रम में और हाल ही में, 2016 के दौरान ओसीपी (OCP) के रूप में शामिल किया गया। डब्ल्यूएचओ ने सेंट्रोक्रोमैन को आईएनएन को ओरमालोक्सिफ़ेन के रूप में सौंपा है। यह बाजार मे सहेली के रूप मैं उपलब्ध है एवं सीएचसी एवं पीएचसी पर छाया के नाम से मुफ्त में उपलब्ध है

 

अब “सहेली”, ब्रांड नाम “छाया” के नाम से राष्ट्रीय परिवार नियोजन कार्यक्रम में शामिल 

एक चयनात्मक एस्ट्रोजन रिसेप्टर मोडुलेटर (SERM) होने के नाते, सेंट्रोक्रोमान सेंट्रल नर्वस सिस्टम (CVS) पर एस्ट्रोजन जैसा प्रभाव दिखाता है साथ ही यह एंटी-ऑस्टियोपोरोटिक गुण भी रखता है। अनुसंधान से ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि यह ओवरी (डिम्बग्रंथि), सिर, गर्दन, क्रोनिक माइलॉयड ल्यूकेमिया कैंसर, एथेरोस्क्लेरोसिस, लिपिड संबंधी बीमारियों के इलाज हेतु रोगनिरोधी (प्रोफ़ायलेक्टिक) औषधि के रूप मैं भी उपयोगी हो सकता है। एक प्रकार से यह महिलाओं के स्वस्थ की देखभाल के लिए उसकी सच्ची सहेली है। इसके अलावा, सेंट्रोक्रोमान (ओर्मलोक्सिफीन) डिफंक्शनल यूट्राइन ब्लीडिंग या अनियंत्रित गर्भाशय रक्तस्राव (DUB) के दौरान भी बेहद फायदेमंद रहा है। टोरेंट फ़ार्मा ने डीयूबी एवं मीनोरेजिया (DUB and Menorrhagia) के लिए सफल क्लिनिकल परीक्षण किये जिससे 1996 में डीसीजीआई ने उसे सेविस्टा ब्रांड मन से की मार्केटिंग के लिए अनुमोदित किया और बाद में एचएलएल ने इसे नोवेक्सडीएस (NovexDS) के रूप में बाजार में विपणन किया। राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर सेंट्रोक्रोमान या ओर्मलोक्सिफीन, सिलेक्टिव एस्ट्रोजन रिसेप्टर मोडुलेटर (SERM) के रूप में लगभग 450 शोध लेखों के माध्यम से मान्यता प्राप्त की है। वर्तमान में सीडीआरआई सिप्ला लिमिटेड मुंबई के साथ मिलकर डिफंक्शनल यूट्राइन ब्लीडिंग (DUB) और स्तन-कैंसर के इलाज के लिए सेंट्रोक्रोमान को ओर्मेलीन के रूप में विकसित कर रहा है।

कोविद -19 महामारी और छाया

हाल ही में सामाजिक संगठन सेंटर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च (सीएफएआर) द्वारा आयोजित एक वेबिनार में, अतिरिक्त मिशन निदेशक, यूपी एनएचएम, डॉ हीरा लाल ने बताया की आंकड़े बताते हैं नॉन-इन्वेजिव (सर्जरी रहित) परिवार नियोजन विधियों जैसे कि कंडोम, मौखिक गोलियां, आपातकालीन गर्भनिरोधक गोलियों की मांग में वृद्धि देखी गई है। उदाहरण के लिए, साप्ताहिक गर्भ निरोधक गोली छाया के वितरण में 81% की वृद्धि दर्ज की गई है।

विश्व गर्भनिरोधक दिवस के अवसर पर सीएसआईआर-सीडीआरआई निदेशक प्रोफेसर तपस कुंडू ने विश्व गर्भनिरोधक दिवस की बधाई देते हुये सेंट्रोक्रोमान के विकास मैं सम्मिलित सभी वैज्ञानिकों को बधाई दी और इस क्षेत्र में भविष्य चुनोटियों के लिए उनकी प्रतिबद्धता के लिए वैज्ञानिकों को प्रोत्साहित किया।

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