छेड़छाड़ व बलात के आरोपियों के चौराहों पर लगेंगे पोस्टर

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राम जनम यादव की रिपोर्ट

बलरामपुर/आजमगढ़: उत्तर प्रदेश सूबे के यशस्वी मुख्यमंत्री माननीय योगी आदित्य नाथ जी ने अपने दो दिवसीय बलरामपुर दौरे पर पुलिस लाइन में कल कई योजनाओं का शुभारंभ करते हुए महिला सुरक्षा के लिए गठित “मिशन शक्ति” का आगाज भी किया जिसके तहत छेड़छाड़ व बलात के आरोपियों के पोस्टर चौराहे पर लगाए जाएंगे।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने शनिवार को नवरात्रि के शुभारंभ पर महिलाओं की सुरक्षा के लिए समर्पित मिशन शक्ति की शुरुआत बलरामपुर जनपद बर्बर कांड के मद्देनजर पीड़िता को श्रद्धांजलि स्वरुप भेंट की।

लेकिन माननीय मुख्यमंत्री जी ने 2 दिन पूर्व घटित बाराबंकी रेप जैसे जघन्य अपराध पर चुप्पी साधे रखी जो हाथरस और बलरामपुर रेप हत्याकांड से भी बर्बर और वीभत्स है,

क्या वह देश की बेटी नहीं थी?

जिस समय माननीय मुख्यमंत्री जी मिशन शक्ति की नींव रख रहे थे तो उसी दौरान लखीमपुर खीरी से एक छेड़छाड़ की घटना समाचार पत्रों की सुर्खियां बन हुई थी जिसमें छेड़छाड़ के आरोप में पकड़े गए युवक को भाजपा विधायक लोकेंद्र बहादुर अपने बेटे तथा सैकड़ों भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ कोतवाली में जमकर हंगामा काटा और छेड़खानी के आरोपी को छुड़ाकर साथ ले भी गए।

दरअसल जनपद लखीमपुर की मोहम्मदी कोतवाली पुलिस ने एक बीजेपी कार्यकर्ता को गिरफ्तार किया था जिस पर छेड़छाड़ का आरोप था, इसकी सूचना जैसे ही भाजपा विधायक को मिली तो वह आग बबूला हो गए क्योंकि आरोपी भाजपा कार्यकर्ता था भाजपा विधायक अपने बेटे और सैकड़ों समर्थकों के साथ कोतवाली जा धमके और थाना परिसर में देर रात तक जमकर हंगामा काटते हुए पुलिस कर्मियों के साथ अभद्र व्यवहार तक किया छेड़खानी के आरोपी को जोर जबरदस्ती कोतवाली से छुड़ाकर साथ भी ले गए।

अब क्या सूबे के मुखिया अपने मिशन शक्ति को सफल बनाने के लिए भाजपा विधायक लोकेंद्र बहादुर उनके बेटे और उनके साथ सैकड़ों समर्थक कार्यकर्ताओं के पोस्टर चौराहों पर लगाएंगे?

वैसे भी सूबे के मुखिया सुर्खियों में रहने वाले त्वरित फैसला लेने वाले मुख्यमंत्री माने जाते हैं लेकिन अभी तक इनके द्वारा लिए गए ज्यादातर फैसले सिर्फ कागजी हवा-हवाई साबित हुए हैं चाहे वह पूर्व भाजपा विधायक सेंगर को बचाने वाले अधिकारियों का मामला हो जिन पर आज तक कोई कार्यवाही नहीं हुई बल्कि बकायदा उनका प्रमोशन भी किया जा चुका है जो जगजाहिर है, भाजपा के के कद्दावर नेता चिन्मयानंद के मामले में भी यही ढिलाई देखने को मिली थी जिसके कारण पीड़िता ने साल भर बाद कोर्ट में अपने बयान बदल दिए जबकि पीड़िता का कोर्ट में 164 के तहत बयान दर्ज है और कई वीडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल है।

मामले में आरोपी के साथ साथ पीड़िता को भी हवालात में डाल दिया गया था बस फर्क इतना था की आरोपी को ऐशो-आराम से सुसज्जित जगह (अस्पताल) से नवाजा गया था और पीड़िता को हवालात नसीब हुई थी। इस मामले में भी कितनी लीपापोती हुई थी प्रदेशवासियों से छिपी नहीं है।

कहावत है कि पूत के पांव पालने में ही नजर आ जाते हैं सूबे के मुखिया की कथनी और करनी में क्या फर्क है आजमगढ़ की घटना इसका जीवंत उदाहरण है? जहां पर सपा कार्यकर्ता लालजीत यादव द्वारा भाजपा के कुछ नेता और कार्यकर्ता के पोस्टर चौराहे पर लगाए गए थे जिन पर छेड़छाड़ या अन्य आरोप थे जिसके एवज में सपा कार्यकर्ता लालजीत यादव पर ही मुकदमा दर्ज कर लिया गया था।

माननीय मुख्यमंत्री जी की महिलाओं को समर्पित मिशन शक्ति धरातल पर कितनी सफल होगी कयास लगाना जरा भी मुश्किल नहीं है एंटी रोमियो स्क्वायड का हस्र उत्तर प्रदेश की जनता देख चुकी है।

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