अपने ही घर में घिर चुके हैं ओली, कई शहरों में युवा सड़कों पर उतर आए

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राजकुमार दास की रिपोर्ट

काठमांडू : भारत के खिलाफ साजिश रचना नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को भारी पड़ सकता है, वह अब अपने ही घर में घिरते दिखाई दे रहे हैं। केपी शर्मा के खिलाफ काठमांडू सहित देश के कई शहरों में युवा सड़कों पर उतर आए हैं। कोरोना संकट में ओली सरकार की नाकामी के खिलाफ बड़ी तादाद में लोग प्रदर्शन कर रहे हैं।

नेपाल पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए वॉटर कैनन और आंसू गैस का इस्तेमाल किया। यह लोग कोरोन वायरस से निपटने में केपी ओली सरकार के कुप्रबंधन के खिलाफ सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। लोग अपर्याप्त चिकित्सा उपकरणों के खिलाफ शिकायत कर रहे हैं, जबकि लागों के पास रहने के लिए सुरक्षित जगह की कमी, कोई उचित दवा और अस्पताल नहीं है।

नेपाल के गृह मंत्रालय ने ओली सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतरे प्रदर्शनकारियों के खिलाफ लॉकडाउन के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए कड़ी कार्रवाई का आदेश दिया है। गृह मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि संबंधित मुख्य जिला अधिकारी लॉकडाउन आदेश की अवहेलना के लिए व्यक्ति पर कार्रवाई कर सकता है और उस व्यक्ति को संक्रामक रोग अधिनियम 2020 के तहत जुर्माना और जेल भेजा जा सकता है।

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COVID-19 Unrest | Nepal police use water cannons & tear gas to disperse protesters

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हालांकि लोग केपी ओली की अगुवाई वाली सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं और उनका आरोप है कि कोरोनो वायरस महामारी के दौरान अपारदर्शी होने और घातक वायरस को नियंत्रित करने में सरकार पूरी तहर असमर्थ है।

प्रदर्शनकारियों ने मांग की है कि परीक्षण किट और मेडिकल सामान की खरीद में होने वाले खर्च को पारदर्शी बनाया जाए। आरडीटी परीक्षण को रोका जाए और अतिरिक्त कर लगाने के निर्णय को वापस लिया जाए।

काठमांडू के अलावा, पोखरा, धरान, चितवन और बीरगंज में प्रदर्शन हुए हैं। देशभर के युवाओं ने प्रदर्शनों को एकत्रित करने के लिए फेसबुक पर ‘Enough is Enough’ का एक पेज बनाया है। इन प्रदर्शनों के बाद ये साफ हो गया है कि नेपाल सरकार भारत के साथ नक्शा विवाद को सिर्फ वहां की जनता का ध्यान भटकाने के इरादे से अंजाम दे रही है।

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